जिले के ग्रामीण इलाकों में भारी संख्या में टिड्डियों के आने से अब किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना टिड्डी दल मंडराते नजर आ रहै हैं, जिनसे मुकाबला करने के लिए संबंधित क्षेत्रों के किसान और कृषि विभाग के अधिकारी ,कर्मचारी पूरी तरह से जुटे हुए हैं।

टिड्डी दलों से किसानों को निजात नहीं मिल पा रही है। कृषि विभाग के उपनिदेशक वीरेन्द्रसिंह सोलंकी ने बताया कि सोमवार की रात को देचू, फलोदी, बाप ,लोहावट और बावड़ी ब्लॉक के कलाऊ, गोविंदपुरा,कनोडिया,नोसर, टकरा, सन्तोकपुरा आदि अनेक गांवों में टिड्डियों का पड़ाव था।

जिसे कृषि और लोकेस्ट विभाग की टीमों ने किसानों के सहयोग से मंगलवार को सुबह केमिकल छिड़काव कर मार दिया। सोलंकी ने बताया कि टिड्डी दलों पर केमिकल छिड़काव करने से 60 प्रतिशत टिड्डियां मरती है बाकी 40 प्रतिशत के छोटे दल आगे उड़ जाते हैं।

मंगलवार को बिलाड़ा, लोहावट,पीलवा, चामू व ओसियां क्षेत्रों में टिड्डियों के छोटे दल उड़ने के समाचार मिले। यहां बुधवार सुबह छिड़काव किया जाएगा। जून माह में रोजाना बाड़मेर,जैसलमेर,बीकानेर व नागौर के रास्ते टिड्डियों के दल आ रहे हैं। इन्होंने बताया कि अभी खेतों में फसलें नहीं होने के कारण खराबा न के बराबर हो रहा है।

हल्की बारिश व नमी होने पर अंडे देना शुरू करेगी
सोलंकी ने बताया कि सोमवार को जिले में आए टिड्डियों के दलों में एक दल में पीले कलर की टिड्डियां मिली है। इनके अनुसार वयस्क होने पर टिड्डियों का रंग गुलाबी से पीले में बदल जाता है। पीले कलर में बदलने के 15 दिन बाद टिड्डियों में प्रजनन शुरू हो जाता है और हल्की बरसात व नमी होने पर अंडे देना शुरू कर देती है।



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Now the locusts started appearing in yellow color
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