31 साल का एक युवक एक सुबह नींद से उठा तो उसकी पत्नी घर से गायब थी। बाद में उसे पता चला कि उसकी पत्नी किसी और युवक के साथ है। वह पुलिस के पास गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा और गुहार लगाई। कोर्ट के नोटिस के बाद पुलिस उसकी पत्नी के पास पहुंची तो उसने जवाब में कहा कि उसे गैरकानूनी रूप से बंधक नहीं बनाया है, वह तो अपनी इच्छा से युवक के साथ रह रही है।

पुलिस द्वारा यह जानकारी देने पर हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए यथोचित कोर्ट में जाने की छूट दी। जोधपुर निवासी बलवीरसिंह ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी उसके साथ गुजरात के सूरत में रह रही थी।

गत 1 मई को सुबह वह उठा तो, उसे उसकी पत्नी गायब मिली। पता करने पर जानकारी मिली कि उसकी पत्नी रेस्पोंडेंट उमेश के साथ सिलिकॉन पाम (सूरत) में है। उसने सूरत के डिंडोली पुलिस थाने में इन परिस्थितियों को लेकर एक प्रतिवेदन दिया और उसकी पत्नी को ढूंढ़ने का आग्रह किया।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि इस पिटीशन में रेस्पोंडेंट उमेश द्वारा याचिकाकर्ता की पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाने के संबंध में कोई प्रकथन नहीं किया गया है। कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। सिरोही एसपी की ओर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने पुलिस के समक्ष बयान दिया है कि वह उमेश के साथ खुद की इच्छा से रह रही है और उसे बंधक नहीं बनाया गया है।

सभी पक्ष जानने के बाद जस्टिस संगीत लोढ़ा व रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक व्यक्ति को अवैध रूप से निरोध से छुड़ाने के लिए जारी की जाती है, लेकिन इस मामले में याचिकाकर्ता प्रारंभिक रूप से यह दर्शाने में विफल रहा है कि उसकी पत्नी को रेस्पोंडेंट नंबर 5 ने गैरकानूनी रूप से बंधक बना रखा है।

दोनों पक्षों के बीच अगर कोई वैवाहिक स्थिति को लेकर विवाद है तो इस कोर्ट द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

Advertisement

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
Top