जयपुर के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भागेदारी निभाने वाले प्राधिकरण (जेडीए) में जनता से जुड़े कई काम अटक रहे हैं। बड़ी वजह एलडीसी से लेकर एनफोर्समेंट ऑफिसर और आरएएस (जोन उपायुक्त) के पद खाली हैं। आरएएस तबादला सूची में 5 आरएएस (कुछ तीसरी बार) आए थे, फिलहाल एक की ज्वाइनिंग।

कोरोना-काल में छूट के बाद अटके कार्यों को जल्द करने का दबाव है लेकिन महत्वपूर्ण पोस्ट खाली होने से सिस्टम गड़बड़ा रहा है। एलडीसी-यूडीसी के बिना फाइलें अधूरी है, पटवारी-अमीन नहीं होने से ग्राउंड रिपोर्ट तैयार नहीं हो रही, फिर उपायुक्त नहीं होने से जोन के काम अटके हैं। जेडीसी टी. रविकांत कहते हैं ‘कुछ आरएएस-ईओ आए हैं,कुछ और आने हैं। टीम कोविड नियंत्रण में भी लगी है।

इन हालात में कैसे हो सकेगा शहर में कामकाज
18 ईओ और 4 डिप्टी एसपी थे, कई महीने बाद केवल 5 आने से आधी टीम: जेडीए की ओर से अवैध निर्माण-अतिक्रमण के मामलों पर कार्रवाई नहीं होने के मामले पिछली सरकार में उठते रहे हैं। अब फिर से वही हालात होने को हैं, क्योंकि एनफोर्समेंट विंग में महज आधी-अधूरी है। अब 5 आने से 9 प्रवर्तन अधिकारी (ईओ) और 2 डिप्टी हैं। अभी तक एक ईओ के पास चार जोन यानी अकेला जोन ही बस्सी से चौमू तक आता है, उसके बावजूद चार गुना।

जोन में पहले ही काम नहीं,बिना आरएएस सब अटका
जेडीए में जोन उपायुक्त जैसे पद खाली हैं। इससे एक जोन में ही 500 से ज्यादा फाइलें, शिकायतें आदि पेंडिंग हो रही है। कुछ को अतिरिक्त चार्ज दिए हुए हैं, लेकिन इससे पिक एंड चूज वाले काम भले ही हो जाएं, जनता के जुड़े जरूरी काम टालने का बहाना जरूर हो जाता है।

शुरुआत में काम की फाइल तैयार करने वाले स्टाफ के पद खाली
किसी भी महकमें में कामकाज की धुरी एलडीसी-यूडीसी से लेकर अकाउंटेंट आदि पद अरसे से खाली हैं। 309 तो एलडीसी-यूडीसी के पद हैं। 80 के आसपास जूनियर अकाउंटेंट, 20 एटीपी (सीटीपी को सरेंडर किए हैं), स्टेनोग्राफर, लीगल असिस्टेंट हैं। पटवारी-अमीन का काम तो जैसे-तैसे रिटायर्ड के भरोसे निकाला जा रहा है।



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फाइल फोटो।
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