(संजीव शर्मा) हाईकोर्ट प्रशासन ने लॉकडाउन के बाद 29 जून से अधीनस्थ कोर्ट को जरूरी दिशा-निर्देश देते हुए न्यायिक कामकाज के लिए खाेल दिया है। हालांकि कोर्ट खुलने के बाद सेनेटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग सहित थर्मल स्कैनिंग को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। जिला न्यायालय जयपुर महानगर की मेट्रो कोर्ट एक व दो में भी 168 न्यायिक अधिकारियों, 1600 न्यायिक कर्मचारियों, 7000 वकीलों व 8000 पक्षकारोें के लिए थर्मल स्कैनिंग व सेनेटाइजेशन की उचित व्यवस्थाएं नहीं हैं।

इससे न्यायिक अधिकारियों, न्यायिक कर्मचारियों, वकीलों व पक्षकारों सहित अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। कोर्ट परिसर में आने वाले वकीलों सहित न्यायिक कर्मचारियों व अन्य पक्षकारों की एंट्री पर न तो कोई थर्मल स्कैनिंग हो रही है और न ही उचित सेनेटाइजेशन ही हो रहा है। न केवल कोर्ट परिसर में बल्कि कोर्ट कक्ष में कोई भी बिना थर्मल स्कैनिंग व सेनेटाइजेशन के बेरोक-टोक आ रहा है। इसके अलावा कोर्ट परिसर में लिफ्ट में आवाजाही व कॉज लिस्ट देखने के दौरान भी सोश्यल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।

केवल पोस्टरों से कोरोना संक्रमण से बचाव का संदेश

जयपुर के मेट्रो कोर्ट एक व दो में एंट्री के लिए चार गेट हैं। लेकिन कोविड: 19 के संक्रमण को देखते हुए फिलहाल गेट संख्या एक व तीन से ही वकीलों, न्यायिक कर्मचारियों व पक्षकारों की एंट्री हो रही है। कहने को तो गेट संख्या एक पर थर्मल स्कैनर मशीन होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस दौरान शुक्रवार को सुबह करीब 11.30 बजे गेट संख्या एक व तीन से वकील व पक्षकार बिना थर्मल स्कैनिंग व सेनेटाइजेशन के ही कोर्ट परिसर में आ रहे थे। गेट संख्या एक पर चार पुलिसकर्मी तैनात थे। लेकिन न तो उनके हाथ में थर्मल स्कैनिंग मशीन ही थी और न ही सेनेटाइजेशन की कोई व्यवस्था थी।

नहीं हो पा रही सोशल डिस्टेंसिंग

मेट्रो कोर्ट एक व दो में वकीलों व पक्षकारों सहित अन्य के बीच सोशल डिस्टेंसिंग नहीं हो पा रही है। केसों की तारीख की लिस्ट को एक ही जगह लगा दिया जाता है जिससे तारीख पता करने के दौरान वकीलों में सोश्यल डिस्टेंसिंग नहीं हो पा रही। वहीं लिफ्ट में आने-जाने के दौरान भी सोश्यल डिस्टेंसिंग नहीं हो रही।

इसके अलावा कोर्ट शिफ्टिंग के काम में लगे हुए मजदूर बिना मास्क व सेनेटाइजर के ही कोर्ट की फाइल व अन्य सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं। ऐसे में यदि कोई भी कोरोना संक्रमित हुआ तो हजारों कोरोना संक्रमित होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।

15 जुलाई तक जरूरी केसों में ही हो सुनवाई

बीसीआर चेयरमैन एस.शाहिद हसन ने सीजे को पत्र लिखकर फिलहाल काेर्ट में नियमित कामकाज बंद कर जरूरी केसों की सुनवाई करने का आग्रह किया है। दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष अनिल चौधरी व महासचिव सतीश शर्मा ने सीजे से मिलकर कोर्ट परिसर में साफ-सफाई सहित थर्मल स्कैनर व सेनेटाइजेशन की मांग की है। कहा है- कोर्ट को बिना तैयारी के ही खोल दिया है जिससे कोरोना संक्रमण बढ़ सकता है।

न्यायिक काम ही नहीं हो रहे तो कोर्ट क्योंं खोले, ई-फाइलिंग में भी तारीखों का पता नहीं चल रहा

वहीं दी बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व महासचिव राजेश चौधरी व संदीप लुहाड़िया व पूर्व उपाध्यक्ष महेश दत्तात्रेय का कहना है कि कोर्ट में जब नियमित कामकाज ही नहीं हो रहा है तो कोर्ट खोले क्यों हैं। कोर्ट में गवाही बंद हैं, ट्रायल नहीं हो रही, कोई कोर्ट हाजिरी माफी दे रहा है तो कोई नहीं दे रहा। वहीं अधिवक्ता योगेश गुप्ता, श्रीकृष्ण खंडेलवाल व भागचंद भारद्वाज का कहना है कि मोबाइल पर तारीख का मैसेज अलग है जबकि कोर्ट अलग बता रही है। ई-फाइलिंग में भी तारीखों का पता नहीं चल रहा।

15 जुलाई तक जरूरी केसों में ही हो सुनवाई

बीसीआर चेयरमैन एस.शाहिद हसन ने सीजे को पत्र लिखकर फिलहाल काेर्ट में नियमित कामकाज बंद कर जरूरी केसों की सुनवाई करने का आग्रह किया है। दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष अनिल चौधरी व महासचिव सतीश शर्मा ने सीजे से मिलकर कोर्ट परिसर में साफ-सफाई सहित थर्मल स्कैनर व सेनेटाइजेशन की मांग की है। कहा है- कोर्ट को बिना तैयारी के ही खोल दिया है जिससे कोरोना संक्रमण बढ़ सकता है।



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Neither thermal scanning nor sanitization, entry of thousands daily, no matter how come and go
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