नगर निगम के सफाई कर्मियों को बिना किसी बचाव उपकरण नाले में उतारकर रात को सफाई करवाई जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री ने छह जुलाई की जनसुनवाई के दौरान सीवरेज चैंबर में उतरकर सफाई करने पर रोक लगाई थी। लेकिन, यहां रात के अंधेरे में सीएम के आदेशों को दरकिनार कर सीवरेज कर्मियों को नंगे बदन नाले में उतार दिया गया।

कर्मचारियों के पास बचाव के लिए लाॅन्ग बूट, ग्लब्ज, मास्क आदि किसी तरह के उपकरण भी नहीं थे। सुबह से लगे सीवर कर्मचारी रात 9 बजे बाद बाहर आ गए और सर्किल के कर्मचारियों को नाले में उतारने को कहा।लेकिन,सर्किल इंस्पेक्टर ने काम का अनुभव नहीं होने की बात कहकर मना कर दिया। इस बात पर विवाद छिड़ गया।

निर्माण शाखा के अभियन्ता भी मौके पर थे। सूचना मिलने पर उपायुक्त ने एक कर्मचारी को सस्पेंड करने की चेतावनी तक दे डाली। इससे माहौल गरमा गया। विवाद के कारण काम बीच में ही रोकना पड़ा। एईएन संजय ठोलिया ने कर्मचारियों को समझाकर शांत किया।

विवाद के कारण एक घंटे तक काम रुका रहा। अंत में तय हुआ कि कर्मचारी नाले में नहीं उतरेंगे। सकर मशीन से जितनी सिल्ट आएगी, खींच ली जाएगी। दरअसल निगम में नाले की मैनुअल सफाई ठेके पर होती थी। सीवरेज की सफाई के लिए अलग से दल बनाया हुआ है, जो सुपर सकर मशीन के साथ रहता है। इसी दल को नाले में उतार दिया गया। जबकि इन कर्मचारियों का कहना था कि संबंधित सर्किल में करीब 200 कर्मचारी हैं। यह काम उन्हीं से कराना चाहिए था।

अवैध कनेक्शन...नाले का पानी सीवरेज से जा रहा था
निगम के पास नाले का पानी सीवरेज में से ही जा रहा था, क्योंकि सड़क के नीचे नाला जाम पड़ा है। नाले से एक पाइप का कनेक्शन सीवरेज में सम्भवतः इसीलिए दिया ताकि पानी की निकासी हो सके। क्योंकि नाले की सफाई के लिए सड़क को बार-बार तोड़ना सम्भव नहीं है। निगम के पास ऐसी कोई मशीनरी भी नहीं है जो सड़क के नीचे से सिल्ट निकाल सके।

2013 तक हर साल मानसून पूर्व नालों की सफाई के लिए नाला गैंग बनाई जाती थी। यह काम ठेके पर होता था। पुल, सड़क और ऐसी संकरी जगहों पर जहां जेसीबी नहीं पहुंच पाती वहां नाला गैंग ही सफाई करती थी। यह सफाई पूरी तरह मैनुअल होती थी। श्रमिक नाले में उतर कर सिल्ट निकालते थे।

  • पुरानी गिन्नानी के इन नालों में सालों से सिल्ट जमा है। सीवरेज में अवैध कनेक्शन दे रखे हैं। नालों की क़भी अच्छी तरह सफाई नहीं हो पाई। निगम के पास कोई योजना भी नहीं है, जिससे नालों की सफाई नियमित हो। यही कारण है कि हर बारिश में गिन्नानी डूबने की हालत में पहुंच जाती है। -महेंद्र बड़गूजर, पार्षद वार्ड 52
  • इस नाले की सफाई लंबे समय के बाद हो रही है। हमने बड़ा रिस्क लिया है। सरकार ने सीवरेज में कर्मचारी उतारने से मना किया है। नाले में काम करने के लिए बचाव के सभी उपकरण कर्मचारियों के पास हैं। उन्होंने क्यों नहीं पहने, इसकी जानकारी ली जाएगी। कर्मचारियों के बीच विवाद को शांत किया जा रहा है। -अभिषेक गहलोत, उपायुक्त


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Restriction… Yet the cleaning workers were taken to the bare body drain
Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

Advertisement

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
Top