15वीं विधानसभा के 14 अगस्त से शुरू हो रहे विवादित सत्र के लिए 2 दिन का प्रश्नकाल भी तय हो गया है। कुल 461 सवाल अभी तक विधानसभा के रिकाॅर्ड पर लिए गए हैं। लेकिन अचरज वाली बात यह है कि जनता की तरफ से विधायकों ने 33 विभागों से एक भी सवाल नहीं किया है।
किसी सत्र में इतनी बड़ी संख्या में विभागों से जन समस्या या मुद्दे के रूप में एक भी सवाल नहीं करने की संभवतया पहली घटना होगी। हर बार चार से पांच विभागों को छोड़कर सभी विभागों से सवाल किए जाते हैं। इसमें भी चौंकाने वाली बात यह है कि 17 व 18 अगस्त के प्रश्नकाल के िलए अभी तक चुने गए सवालों में से फोन टैपिंग से जुड़ा सवाल भी बाहर कर दिया है। जबकि बीजेपी फोन टैपिंग को प्रमुख मुद्दा बना कर घेरने का ऐलान कर चुकी है और कालीचरण सराफ ने यह सवाल भी लगा रखा है। सर्वाधिक सवाल किरण माहेश्वरी के 27 और 25 पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी के रिकाॅर्ड पर लिए गए हैं। इस बार टाॅप-10 मंत्रियों के मामले में भी परम्परा टूटी है। बिजली-पानी और यूडीएच की जगह सर्वाधिक सवाल 54 रघु शर्मा से पूछे गए हैं। दूसरे नंबर पर बी डी कल्ला है, जिनसे बिजली के 27 सवाल किए गए हैं। तीसरे नंबर पर सड़कों से जुड़ा पीडब्लूडी हैं, जिसका अभी कोई मंत्री नहीं है, लेेकिन सवाल 26 लगाए गए हैं।
पानी और शिक्षा से 24-24, स्वायत्त शासन से 23, सहकारिता और कृषि से 20-20, गृह विभाग से 18, वन विभाग से 17 तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्रालय से 14 प्रश्न पूछे गए हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा : कोरोना, टिड्डी, श्रमिकों को लेकर 6-6 सवाल
विधायकों की तरफ से जनता की मांग के आधार पर लगाए सवालों में सबसे बड़ा मुद्दा कोरोना लग रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा से 54 सवाल किए हैं, जिनमें से 26 अकेले कोरोना को लेकर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से टिड्डी दलों के हमले और नुकसान पर 6, कोरोना काल में श्रमिकों के राजस्थान आने-जाने पर आधारित 6 सवाल हैं।
इन्होंने कुछ भी नहीं पूछा
अभी तक के 461 सवालों की फेहरिस्त को देखें तो भूजल, मोटर गैराज, सैनिक कल्याण, विज्ञान प्रोद्योगिकी, आईटी, सीएम सचिवालय, केबिनेट सचिवालय, पर्यावरण, नागरिक उड्डयन, तकनीकी शिक्षा, निर्वाचन, वक्फ, अल्प संख्यक मामलात जैसे 33 विभागों के मंत्रियों से किसी विधायक ने एक भी सवाल नहीं पूछा।
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