प्रदेश में उद्योग विभाग व जिला उद्योग केंद्रों की ओर से अब रीको को जमीन आवंटित नहीं की जाएगी। अब केवल राजस्व विभाग या जिला प्रशासन ही नए इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जमीन आवंटित करेगा तथा नियमानुसार नामांतकरण खोलेगा। वहीं अब तक जिला उद्योग केंद्रों से रीको को ट्रांसफर हुई जमीन पर उद्योगों की वर्तमान स्थिति ही रहेगी। यानि इसे नियमानुसार सही माना जाएगा।
उद्योग विभाग व राजस्व विभाग के बीच बनी सहमति के बाद प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा उद्योगों में राहत की सांस है। जिला उद्योग केंद्र से रीको में गए औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों की जमीन का ट्रांसफर व उपविभाजन होता रहेगा।

पहले राजस्व विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने उद्योग विभाग व जिला उद्योग केंद्रों की ओर से रीको को जमीन आवंटन को गलत बताते हुए रोक लगा दी थी और सर्कुलर निकाल दिया था। इस मामले में मुख्य सचिव को दखल देना पड़ा था। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव आनंद कुमार का कहना है कि अब तक हुई आवंटन को सही माना जाएगा। आगे से केवल राजस्व विभाग ही रीको को जमीन देगा।

ये है मामला
प्रदेश में रीको व जिला उद्योग केंद्रों की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया बसाए जाते है। कई जगह जिला उद्योग केंद्रों (डीआईसी) ने रीको को इंडस्ट्रियल एरिया ट्रांसफर कर दिए है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने 15 मई को सर्कुलर जारी किया कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धार 102 के तहत केवल राजस्व विभाग या कलेक्टर ही जमीन का आवंटन कर सकता है। जबकि बड़े स्तर पर उद्योग विभाग, जिला उद्योग केंद्र की ओर से भी जमीनों का आवंटन किया है। ये सभी आवंटन अमान्य माने जाएंगे, जिनका नाम नहीं चढ़ा है तथा इनका म्यूटेशन नहीं खोला जाए।



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प्रतीकात्मक फोटो।
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