कोविड-19 के चलते मोहर्रम के मौके पर दरगाह क्षेत्र में पहली बार चौकी का जुलूस नहीं निकलेगा। प्रतीक के रूप में यह रस्म गुरुवार को लंगर खाना में अदा की जाएगी। इसमें भी केवल पासधारी लोग ही शामिल होंगे। इधर, लंगर खाना स्थित इमामबारगाह में मौरूसी अमले ने मंगलवार से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कदीमी इमामबारगाह लंगर खाने में आयोजित होने वाली मोहर्रम की रस्मों की आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं प्रभारी मुजफ्फर भारती ने बताया कि इस बार चांद रात को मोहर्रम के मौके पर हर साल निकलने वाला चौकी का जुलूस नहीं निकलेगा। प्रतीक रूप में ही चौकी की रस्म अदा की जाएगी। अस्र के बाद यह रस्म लंगर खाना में ही शुरू होगी।

लंगर खाना स्थित इमाम बारगाह से चौकी और तबर्रुकात रोशनी के वक्त से पूर्व मकबरे बड़े ताजिये तक ले जाई जाएंगी। यहां पर सभी तबर्रुकात पेश किए जाएंगे। बाद में चौकी वापस लंगर खाना लाई जाएगी। यहां पर चांदी के ताजिये जियारत के लिए खोल दिए जाएंगे। अमले की ओर से 5 किलो शरबत पर नियाज दिलाई जाएगी। इस रस्म में केवल जिला प्रशासन की ओर से जिन लोगों को पास जारी किए जाएंगे, वही शामिल होंगे।
यह होता रहा है हर साल : हर साल चांद रात के मौके पर अस्र की नमाज के बाद दरगाह गेस्ट हाउस से चौकी को जुलूस के रूप में लेकर अकीदतमंद रवाना होते थे। इसमें बड़ी संख्या में खुद्दाम ए ख्वाजा भी शामिल होते हैं। यह जुलूस रोशनी के वक्त से पूर्व दरगाह के लंगर खाना स्थित इमाम बारगाह में पहुंच कर समापन हो जाता था। यहां पर सलातो सलाम पेश किया जाता था। इस बार प्रतीक स्वरूप सभी रस्में लंगर खाना स्थित इमामबारगाह में ही होंगी।
चांद दिखाई देने पर मजलिस शुरू होगी : परंपरा के अनुसार मोहर्रम का चांद दिखाई देने पर लंगर खाना स्थित इमाम बारगाह में 12 दिन तक मजलिस मर्सियाख्वानी एवं बयाने शहादत परंपरागत से आयोजित किया जाता है। चांद दिखने की स्थिति में लंगरखाने की कदीम इमामबारगाह में बयान ए शहादत और मरसिया ख़्वानी रात्रि 10:00 बजे से समापन होने तक प्रारंभ होगी जो मोहर्रम की 9 तारीख तक लगातार यथा समय में ही जारी रहेगी।



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