प्रदेश में कोरोना संक्रमण की भयावहता के कारण ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों की कमी हो गई है। अब कालाबाजारी हो रही है। सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा है। ऐसे में ऑक्सीजन गैस प्रोडक्ट करने वाले प्लांट केवल हॉस्पिटल में ही 90 फीसदी सिलेंडर सप्लाई कर रहे है। अस्पताल की सप्लाई पूरी होने के बाद ही कुछ सिलेंडर उद्योगों के लिए दिए जा रहे है। ऐसे में प्रदेश के रोलिंग मिल, फैब्रिकेशन, लोहा कंटिंग, ट्रांसफार्मर मैन्युफेक्चर व स्टील से जुड़े 20 हजार से ज्यादा उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है।
प्रदेश में ऑक्सीजन गैस प्रोडक्शन के करीब 20 प्लांट है। इसमें से छह प्लांट जयपुर में है। हर प्लांट से रोजाना 500 से 800 सिलेंडर सप्लाई हो रही है। यानि इन प्लांट से रोजाना 14 हजार ऑक्सीजन गैस सिलेंडर भर कर निकल रहे है। जबकि उद्योगों को केवल 1500 सिलेंडर ही मिल पा रहे है, जबकि इनकी डिमांड 6 हजार से ज्यादा सिलेंडर की है। मेडिकल के लिए ऑक्सीजन गैस नहीं मिलने की शिकायतों के बाद कई प्लांट पर ड्रग कंट्रोलर दफ्तर के कर्मचारी तैनात कर दिए है।
अब अस्पतालों में सप्लाई करने के बाद ही दूसरे काम के लिए सिलेंडर दिए जा सकते है। लेकिन उद्योग विभाग और सरकार की ओर से ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की सप्लाई बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं किए है। विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष ताराचंद चौधरी का कहना का है कि ऑक्सीजन गैस सिलेंडर सप्लाई नहीं होने से उद्योगों में प्रोडक्शन ठप हो रहा है। सरकार को मेडिकल के साथ ही इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार सप्लाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
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