अजमेर जिला काेराेना संक्रमितों के मामले में शुक्रवार काे 7 हजारी हाे गया। जिले में शुक्रवार काे 235 नए काेराेना पॉजिटिव मरीज मिलने के साथ ही आंकड़ा 7,129 तक पहुंच गया। गत सप्ताह के आंकड़ों पर गाैर करें ताे काेराेना मरीजों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। महज छह दिन में जिले में दाे हजार नए काेराेना मरीज सामने आए हैं।
शुक्रवार काे जेएलएन के तीन कार्मिक, ब्यावर में मेडिकल ज्यूरिस्ट, सेंट्रल जेल में 23 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं, जेएलएन में उपचाररत तीन काेराेना संक्रमित मरीजों की माैत हाे गई। रोजाना अजमेर में करीब तीन से पांच मरीजों की माैत हाे रही है। शुक्रवार देर शाम तक काेराेना से मरने वाले मरीजों की कुल संख्या 192 तक पहुंच गई।
हर तीन दिनों में आंकड़ा एक हजार पार
जिले में बीते छह दिनों का आंकड़ा देखें ताे 5 सितंबर काे सबसे पहले काेराेना संक्रमित मरीजों की संख्या पांच हजार तक पहुंची। महज तीन दिन बाद यानी 8 सितंबर काे संक्रमितों का ग्राफ 6 हजार हाे गया। अब तीन दिन बाद फिर एक हजार की संख्या पार करके काेराेना मरीजों का आंकड़ा 7 हजारी हाे गया।
यहां के हैं संक्रमित
अजमेर जिले में शुक्रवार काे काेराेना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 7,129 हाे गया। इनमें अजमेर शहर में 174, ब्यावर 36, किशनगढ़ 12, जेठाना 2, नसीराबाद में 11 काेराेना पॉजिटिव मरीज मिले हैं।
इन मरीजों की मौत
किशनगढ़ के आजाद नगर निवासी 68 वर्षीय वृद्धा।
अजमेर के पलटन बाजार निवासी 66 वर्षीय वृद्ध।
पीसांगन निवासी पुरुष।
जेएलएन के तीन कार्मिक भी कोरोना की चपेट में
कस्तूरबा चिकित्सालय में शुक्रवार को कोरोना संदिग्धों की जांच करती मेडिकल टीम। यहां गत दिनों 3 स्टाफ संक्रमित हो चुका है।
गलत नाम-पते लिखवाने से परेशानी, पॉजिटिव काे कहां तलाशे टीम
काेराेना महामारी में आमजन के स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा विभाग काेविड की जांच हर डिस्पेंसरी और जेएलएन में कर रहा है, लेकिन यहां पर भी काेविड की जांच कई लाेग मनोरंजन के लिए करवा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसी शिकायतें चिकित्सक बता रहे हैं कि यहां जांच के दौरान आने वाले लाेग अपना नाम व पता गलत लिखवा रहे हैं।
एक ही व्यक्ति दाे से तीन जगह जांच करवा रहा है। कई लाेगाें की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पता चलता है कि वही नाम व पता दूसरी डिस्पेंसरी में भी आ रहा है। काेविड का नोटिस चस्पा करने पहुंच रही टीम संबंधित संक्रमित के घर पहुंचती है ताे पता लगता है कि दूसरी टीम आकर यहां नोटिस लगाकर हाेम क्वारेंटाइन कर गई।
कई मामलों में पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल में लिखवाए गए नाम पतों की जब जांच हाेती है ताे पता चलता है कि मरीज का नाम और मोबाइल नंबर भी गलत है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति की पहचान तक नहीं हाे पाती। ऐसे मामलों काे लेकर मांग की जा रही है कि अब आधार कार्ड या काेई पहचान पत्र साथ लेकर आने वाले व्यक्ति की ही जांच की जाए ताकि फर्जीवाड़े पर राेक लग सके।
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