राजस्थान में कालीसिंध नदी पर हिचर गांव के पास स्थित हरिश्चंद्र सागर बांध से 40 किमी लंबी नहर निकली है। यह झालावाड़ और कोटा-सांगोद क्षेत्र के 45 गांवों के किसानों की भाग्यरेखा बनी है। इस नहर से दोनों जिलों में करीब 10 हजार हेक्टेयर खेत में धान का उत्पादन होता है। यह नहर उजाड़ नदी में जाकर मिलती है।

चावल का विदेशों तक निर्यात: यहां से उत्पादित उत्तम किस्म के चावल का देश के अलावा विदेशों में भी निर्यात होता है। इससे इस क्षेत्र की धान उत्पादन के मामले में खास पहचान बन गई है। धान उत्पादन में पानी की अधिक जरूरत होती है। ऐसे में हरिश्चंद्र सागर से निकलने वाली नहर से निर्बाध पानी मिलता है।
चट्‌टानें काट कर निकाली गई थी नहर: कालीसिंध नदी के पाट क्षेत्र में ही बांध स्थल से चट्‌टानों की कटाई कर नहर को निकाला गया था। करीब 15 फीट गहराई और 15 किमी लंबाई तक चट्‌टानों की कटिंग कर इस नहर को आगे 40 किमी तक ले जाया गया। इस नदी में बहाव शुरू होने के साथ ही नहर में पानी आना शुरू हो जाता है, जब तक नदी में बहाव रहता है, तब तक नहर भी चलती रहती है।



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Paddy is produced in 10 thousand hectares of 45 villages of Rajasthan through 40 km canal, originating from Harishchandra Sagar Dam.
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