नए अस्पताल में कृत्रिम ऑक्सीजन पर सांसें ले रहे डेढ़ साै से ज्यादा मरीजाें की जान पर मंगलवार मध्यरात्रि बाद ऐसा संकट आया कि एक बारगी सभी डाॅक्टराें की भी सांसें अटक गई। ऑक्सीजन प्लांट पहले से अलर्ट माेड पर था, लेकिन रात काे ऑक्सीजन प्लांट खुद ऐसी स्थिति में आ गया कि किसी भी वक्त सप्लाई बंद हाे सकती थी। हालांकि रात काे ही मेडिकल काॅलेज के डाॅक्टर सक्रिय हुए।

सारे प्राइवेट हाॅस्पिटलाें से मदद मांगी, यदि कहीं एक सिलेंडर भी था ताे उसे उठवाया। नए अस्पताल के वार्डाें में पड़े सिलेंडर भी कलेक्ट किए। देर रात जिला प्रशासन के दखल के बाद एक ऑक्सीजन सप्लायर काे जगाया गया और वहां से करीब 30 सिलेंडर रिफिल कराए गए।

जैसे-तैसे पूरी रात काटी और सुबह नियमित सप्लाई के 170 सिलेंडर मिलने पर डाॅक्टराें ने राहत की सांस ली। नए अस्पताल ही नहीं, एमबीएस अस्पताल में भी रात काे ऑक्सीजन खत्म हाेने की स्थिति में अा गई, तात्कालिक व्यवस्था के ताैर पर जेकेलाेन अस्पताल से सिलेंडर मंगवाकर काम चलाया गया।

रोज 900 सिलेंडर की जरूरत, लेकिन सप्लायर 700 ही दे रहा है, चित्तौड़गढ़ से मंगानी पड़ रही दो गाड़ियां

मेडिकल काॅलेज में राेजाना ऑक्सीजन सिलेंडर की रिक्वायरमेंट 900 सिलेंडर से ज्यादा पहुंच चुकी है, जबकि माैजूदा सप्लायर की अधिकतम क्षमता 700 सिलेंडर प्रतिदिन तक है। ऐसे में सप्लायर पिछले करीब 7 दिन से राेजाना एक या दाे गाड़ी चित्ताैड़गढ़ से मंगवा रहा है और उसी की बदाैलत सबकुछ नाॅर्मल चल रहा था।

रात काे दिक्कत यह हुई कि रिफिल के लिए चित्ताैड़गढ़ गई गाड़ी लेट हाे गई, जब वहां पता किया ताे सामने आया कि वहां के प्लांट पर बिजली बंद हाेने से देरी हुई। ऐसे में वे सिलेंडर नहीं मिल पाए और इधर ऑक्सीजन खत्म हाेने जैसी स्थिति आ गई।

चित्तौड़गढ़ से गाड़ी लेट होने की वजह से बिगड़े हालात, आर्मी से भी मंगवाएजैसे ही रात काे प्लांट के कार्मिक ने सूचना दी और वेंटीलेटर्स के अलार्म बजे ताे वहीं काेविड संक्रमित हाेकर एडमिट प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना सक्रिय हाे गए। उन्हाेंने रात काे ही पूरी टीम काे जगा दिया, जिला प्रशासन काे भी सारी स्थिति से अवगत कराया गया।

देर रात अधीक्षक डाॅ. एस जैलिया, काेविड इंचार्ज डाॅ. नीलेश जैन, ऑक्सीजन प्लांट इंचार्ज डाॅ. चिरंजीलाल खेड़िया व ऑक्सीजन संबंधी व्यवस्थाओं में लगे डाॅ. आशीष हाॅस्पिटल पहुंच गए। सभी ने एक-एक प्राइवेट हाॅस्पिटल काे काॅल किए और वहां उपलब्ध इक्कादुक्का सिलेंडर उठवाए।

प्रशासन की मांग पर आर्मी हाॅस्पिटल से भी 12 सिलेंडर मंगवाए गए। रात काे ही प्रशासन ने एक ऑक्सीजन प्लांट संचालक काे जगाया और प्लांट खुलवाकर वहां से 30 सिलेंडर रिफिल कराए, जिनमें से 15-15 सिलेंडर एमबीएस व नए अस्पताल काे भेजे गए।

इस जुगाड़ से पूरी रात काटी और सुबह करीब 6 बजे चित्ताैड़गढ़ से 170 सिलेंडर रिफिल कराकर गाड़ी पहुंची, तब जाकर हालात नाॅर्मल हुए। रात करीब 12 बजे से तड़के 4 बजे तक मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टर जगे रहे और सुबह हालात नॉर्मल होने के बाद घर गए।दाेपहर में पहुंचा लिक्विड ऑक्सीजन टैंक, इससे रिफिल किए जा सकेंगे 1400 सिलेंडर, अब नहीं होगी परेशानी

ऑक्सीजन की मारामारी के बीच ही बुधवार काे लिक्विड ऑक्सीजन टैंक काेटा पहुंच गया, इसकी ऑक्सीजन काे मेडिकल काॅलेज के सप्लायर के रानपुर स्थित टैंक में स्टाेर किया गया है। इस टैंक से 1400 सिलेंडर ऑक्सीजन बन पाएगी।

हालांकि मेडिकल काॅलेज प्रबंधन का कहना है कि उक्त लिक्विड ऑक्सीजन सिर्फ इमरजेंसी के लिए मंगवाकर रखी गई है, रोजाना की ऑक्सीजन सप्लायर से आती रहेगी। यह इसलिए है कि मंगलवार रात जैसी परिस्थितियां पैदा नहीं हो। यदि किसी भी कारण से रूटीन सप्लाई बाधित होती है तो इसका यूज किया जा सकेगा।



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The oxygen hospital of the new hospital responded late at night, one hundred and fifty patients in danger for 5 hours
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