एमडीएस यूनिवर्सिटी के निलंबित वीसी रामपाल सिंह ने भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत में सोमवार को एक अर्जी पेश कर एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से की गई कार्रवाई पर कानूनी पेंच फंसा दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून में 2018 में हुए एक संशोधन का हवाला देते हुए रामपाल सिंह की ओर से कहा गया है कि उसे रंगेहाथों नहीं पकड़ा गया है।

बतौर कुलपति पद के निर्वहन में जो काम किए है, उसके लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17-क के तहत बिना सक्षम स्तर से अनुमति लिए कोई कार्रवाई एसीबी को करने का अधिकार नहीं है, इसलिए इसी स्तर पर सभी आरापों से डिस्चार्ज किए जाने योग्य है। अर्जी पर 16 सितंबर को सुनवाई होगी।

रामपाल सिंह ने वकील अजय वर्मा के जरिये दायर अर्जी में कहा है कि वह स्वयं शिक्षक और कुलपति के सम्मानीय पद पर हैं और एफआईआर में उसके खिलाफ किसी भी प्रकार से कोई रिश्वत, अनुचित लाभ, प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करने या मांगने का आरोप नहीं है। एसीबी की सारी कहानी टेलिफोनिक वार्ता पर आधारित है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में यह प्रावधान है कि ‘लोक सेवक की ओर से राजकीय प्रकार्य अथवा कर्तव्यों के निर्वहन में की गई अनुशंसा अथवा किए गए निर्णयों की जांच पड़ताल या अन्वेषण तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि ऐसी जांच, पड़ताल और अन्वेषण के लिए सक्षम स्तर से पूर्वानुमोदन प्राप्त नहीं कर लिया गया हो।

रामपाल सिंह के मामले में ऐसी कोई पूर्वामोदन पत्रावली पर एसीबी ने पेश नहीं किया है। रामपाल सिंह की ओर से अर्जी में कहा गया है कि दो साल पहले कानून में संशोधन कर यह नया प्रावधान जोड़ा गया है इसकी पालना अनिवार्य रूप से की जानी है। इसलिए रामपाल सिंह की गिरफ्तारी ही शुरू से शून्य और विधिविरूद्ध है।
गिरफ्तारी से पहले नहीं दिया नोटिस
रामपाल सिंह की ओर से अर्जी में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरनेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार के मामले में दी गई गाइड लाइन की पालना नहीं करने का मुद्दा उठाया है। इस नजीर के तहत सात साल तक के कारावास की सजा के मामलों में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी है। रामपाल सिंह के खिलाफ भी जो आरोप हैं, वह सभी सात साल तक की सजा से जुड़े हैं, ऐसे में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी था।

अर्जी में प्रार्थना की गई है कि अनुसंधान अधिकारी को तलब कर उनसे रामपाल सिंह के विरूद्ध कार्रवाई से पूर्व सक्षम स्तर से पूर्वानुमोदन बाबत कागजात मंगवाए जाने चाहिए। अगर एसीबी ने प्रकरण में कार्रवाई से पहले सक्षम स्तर से पूर्वानुमोदन नहीं करवाया है तो रामपाल सिंह को इसी स्तर पर सभी आरोपों से डिस्चार्ज किया जाना चाहिए।



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निलंबित वीसी प्रो. रामपाल सिंह (फाइल फोटो)
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