उदयपुर के वन और वन्यजीव विशेषज्ञ डाॅ. सतीश शर्मा ने सवाई माधोपुर के रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र के बाहरी भाग में तितलियाें की दो नई प्रजातियों की खाेज की है। इनके साथ खाेज करने में टाइगर वॉच के फील्ड बॉयोलोजिस्ट डॉ. धर्मेंद्र खण्डाल भी थे। सतीश शर्मा ने बताया कि देशभर में बिग बटरफ्लाई मंथ चल रहा है।

परियोजना क्षेत्र के बाहरी भाग में उनके द्वारा राजस्थान की सुंदर तितलियों में शुमार दक्खन ट्राई कलर पाइड फ्लेट (कोलाडेलिया इन्द्राणी इन्द्रा) और स्पॉटेड स्माल फ्लेट (सारंगेसा पुरेन्द्र सती) तितलियों को खोजा गया है। यह दोनों ही तितलियां हेसपेरिडी कुल की सदस्य हैं।


रणथंभौर बाघ परियोजना क्षेत्र के बाहरी भाग में खोजी गई दक्खन ट्राई कलर पाइड फ्लेट (कोलाडेलिया इन्द्राणी इन्द्रा)

स्पॉटेड स्माल फ्लेट (सारंगेसा पुरेन्द्र सती) तितली।

उन्हाेंने बताया कि कोलाडेनिया इन्द्राणी इन्द्रा तितली के पंखों की ऊपरी सतह सुनहरी पीले रंग की होती है, जिस पर पहली जोड़ी पंखों के बाहरी कोर पर काले बॉर्डर वाले चार-चार अर्द्ध पारदर्शक सफेद धब्बे होते हैं। अन्य दो-दो छोटे-छोटे धब्बे होते हैं। पिछली जोड़ी पंखों पर काले धब्बे होते हैं। इस तितली का धड़, पेट और पैर पीली, आंखें काली होती हैं। पंखों के कोर काले होते हैं जिनमें थोड़े-थोड़े अंतराल पर सफेद धब्बे होते हैं।

यह बंगाल, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी-पूर्वी भारत, छतीसगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तराखंड में पाई जाती है। सारंगेसा पुरेंद्र सती नामक तितली भूरे-काले रंग पर सफेद धब्बों के बिखरे पैटर्न से आकर्षक लगती हैं। इसकी शृगिकाएं सफेद रंग की लेकिन शीर्ष कालापन लिए होता है।

यह तितली गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड में मिलती है। वर्तमान में यह तितली सवाई माधोपुर, करौली, बूंदी और टोंक जिलों में है।



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