21 मार्च 2015... बूढ़ी औरत रामगंज थाने आई और बोली- मेरा बेटा 30 साल का बेटा ओमप्रकाश कल से गायब हैं। बेटे की चप्पल घर पर ही खुली हैं और मोबाइल भी बिस्तर पर रखा है। मैं खुद कुछ पुलिस जवानों के साथ उस औरत के घर गया। वो मजदूर परिवार था और हत्या की बात किसी ने नहीं सोची थी। न परिजनों ने इसका शक जताया। दो दिन बाद वो मां फिर आकर रोने लगी। मुझे पहले दिन से न जाने क्यों बार-बार चप्पल बहुत खटक रही थी, कोई भी व्यक्ति बिना चप्पल पहने घर के बाहर क्यों जाएगा? इस क्यों का जवाब नहीं मिल रहा था।

मैंने हत्या के एंगल पर जांच शुरू की। प्रेम-प्रसंग, दुश्मनी, उधारी, मारपीट.. तमाम एंगलों पर 5 दिनों तक एक्सरसाइज की। हम रोज उसके घर जाते और एफएसएल टीम, डॉग स्क्वायर्ड से जांच करवाते, लेकिन नतीजा शून्य। एक दिन मोहल्ले के एक व्यक्ति ने हमसे कहा कि आप तीन मकान छोड़कर इस बड़े से घर वालों से बात क्यों नहीं करते, ओमप्रकाश वहां आता-जाता था। मैंने सोचा कि वो परिवार संभ्रात, पढ़ा-लिखा व पैसे वालों का है तो उसका मजदूर से क्या कनेक्शन हो सकता है, लेकिन अनजान से मिली टिप से हम वहां चले गए।

पुलिस को देख इस घरवाले घबराए। हालांकि, हम उनसे ज्यादा कुछ नहीं पूछ पाए। लेकिन, पता चला कि इनका एक फार्म हाउस है और ओमप्रकाश ने वहां काम किया है। हम एक बार फिर मकान में गए और 25 किमी. दूर पुष्कर रोड पर उनके फार्म हाउस चलने को कहा। घरवाले घबरा गए, विरोध किया। यही घबराहट और विरोध मुझे उन पर संदेह की वजह दे रहा था।

10 दिन बीत गए मगर कुछ पता नहीं चल रहा था। अनायास किस्मत ने साथ दिया। फार्म हाउस में एक कमरे में पांच सोफे के सेट में से तीन की गद्दियां गायब थीं और वहां जरूरत से ज्यादा सफाई थी जबकि बाकी कमरों में नहीं। सोफे के नीचे व दीवार पर डॉग क्वायड और एफएसएल टीम को खून लगा मिला। खून से कहानी ने नया मोड़ ले लिया था। हमाने 3 टीमें बनाईं। एक टीम ने रैकी शुरू की, दूसरी ने गद्दियां ढूंढ़नी शुरू कीं और तीसरी ने आसपास के लोगों से पूछताछ।

एक मुखबिर ने फार्म हाउस से आधा किमी. दूर एक बस्ती में उस तरह की नई गद्दियां होने की बात बताई। पुलिस को कचरा बीनने वालों ने बताया कि वो फार्म हाउस के पास खून से सनी पड़ी थीं। हमारे पास अब पर्याप्त सबूत थे तो सख्त पूछताछ शुरू की। फार्म हाउस मालिक ने सब उगल दिया। आरोपी मन्नू ने बताया कि उसके मकान में कुछ अनैतिक गतिविधियां चलती थीं। मृतक ओमप्रकाश पड़ोस के निर्माणाधीन मकान में चौकीदार था। उसका मोबाइल-लेपटॉप चोरी हुआ तो ओमप्रकाश पर शक किया। मन्नू का नौकर उसे दारू पिलाने के बहाने घर के बाहर से 21 मार्च को बाइक पर बैठाकर ले गया था इसलिए चप्पलें नहीं पहनी थीं।

फार्म हाउस पर लाकर चोरी उगलवाने के लिए ओमप्रकाश को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। आरोपियों ने पहले तो ओमप्रकाश की लाश को गाड़ दिया, फिर हिंदू को गाड़ने पर भूत बनने का डर लगा तो लाश निकालकर जला दी। इसके बाद राख और हडि्डयां कट्‌टे में बंद करके आनासागर झील बांडी नदी में फेंक दिया। कबूलनामे के बाद पुलिस ने गोताखोरों की मदद से हडि्डयों के उस कट्‌टे को भी बरामद कर लिया। अंत में उक्त केस में 5 आरोपी गिरफ्तार हुए।




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फाइल फोटो
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