विद्याधर नगर में लीज शर्त और बिल्डिंग निर्माण नियमाें का उल्लंघन किया जा रहा है। विद्याधर नगर सेक्टर-5 विकास समिति का आराेप है कि अवैध निर्माण और लीज शर्ताें के उल्लंघन काे लेकर जेडीए में कई बार शिकायतें की गई, लेकिन अधिकारियाें की उदासीनता के चलते यहां बड़े स्तर पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही है, जबकि नियमानुसार सेक्टर-5 केवल एकल ईकाई निवास काे मंजूरी है।
समिति के संस्थापक प्रदीप शर्मा ने बताया कि सुप्रीम काेर्ट के अादेश पर 2016-17 में विद्याधर नगर में अवाप्त जमीन के बदले काश्तकाराें काे न्यूनतम दराें पर डवलप जमीन दी गई थी। नियमानुसार काश्तकार काे इन जमीनाें पर 6 महीने में बिल्डिंग निर्माण शुरू करना हाेता है। 5 साल में निर्माण पूरा करना आवश्यक है, लेकिन 10 साल तक किसी काे हस्तांतरित या बेचान नहीं कर सकते।
काश्तकाराें ने लीज शर्ताें का उल्लंघन करते हुए जमीनाें काे बिल्डर्स काे बेच दी और बिल्डर्स विद्याधर नगर स्कीम नियमाें का उल्लंघन कर बहुुमंजिला इमारतें बना रहे हैं। विकास समिति पहले दिन से इन मामलाें की शिकायत जेडीए में कर रही है, लेकिन अब माैके पर करीब 10 बिल्डिंग का निर्माण हाे गया, बावजूद इसके काेई कार्रवाई नहीं हुई। यहीं नहीं जेडीए अधिकारियाें ने इन जमीनाें पर बिल्डिंग निर्माण के नक्शे भी पास कर दिए।
अवाप्त भूमि के बदले 18 काश्तकाराें काे 10 हजार वर्गमीटर जमीन मिली
जेडीए ने अवाप्त भूमि के बदले विद्याधर नगर में 18 काश्तकाराें काे कुल 10258 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई। इनमें कई काश्तकाराें ने जमीन बिल्डराें काे बेच दी। समिति के उपाध्यक्ष पीपी भारद्वाज ने बताया कि एक मामले काे लेकर जब समिति ने काेर्ट का दरवाजा खटखटाया ताे कमिश्नर ने 24 मई, 2018 की माैका रिपाेर्ट उक्त निर्माण काे अवैधानिक माना। इसके अलावा बिल्डर्स ने रसूख के चलते डार्क जाेन हाेने के बावजूद भवनाें में ट्यूबवैल खाेद लिए। जमीनाें पर जीराे सैट बैक पर निर्माण हाे रहा है जाे सीधे ही अवैध निर्माण की श्रेणी में आते है।
- इस तरह का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि काश्तकाराें ने आवंटित जमीन किसी काे हस्तान्तरित की भी है ताे उनके आवंटन पत्राें की जांच की जाएगी। यदि आवंटन पत्र की शर्तों का उल्लंघन पाया गया ताे नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। - शैफाली कुशवाह, उपायुक्त जाेन-2 अतिरिक्त प्रभार
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