शहर के करीब निचला घंटाला गांव में गुर्जर समाज के लोग श्राद्ध व दीवाली एक साथ मानते हैं। दीवाली के दिन समाजजन एक साथ बैंड बाजे के साथ गांव से होकर नदी घाट पर पहुंचते हैं, जहां पहले से तैयार डाबड़ा नामक घास व खैकरे के बेल से नदी के पानी मे लंबी बेल बनाई जाती हैं। जिसको गुर्जर समाज के लोग एक साथ लाइन में खड़े होकर हाथ में उठाते हैं।

उनके हाथों पर दूध दही घी से हाथ पर लगाया जाता हैं फिर इष्ट देव देवनारायण भगवान के जय कारे के साथ पानी में बहाया जाता हैं। फिर हवन घी दूध दही से हवन करते है। इस दाैरान आसपास के गांवाें आस पास से आए गरीब और जरुरमंद लाेगाें काे खीर का भाेजन कराया। कागज के दीपक या खैकरे के पत्ते से दीपकदान बनाकर जल में बहाया। लाेगाें ने अपनाें से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।



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Gurjar society fed the pudding to the needy
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