कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या भले ही बढ़ रही हो लेकिन गंभीर मरीजों की संख्या कम हो रही है। नतीजतन अस्पतालों में भी कम मरीज हुए हैं। स्थिति यह है आरयूएचएस में ही 1200 बेड में से केवल 472 मरीज ही भर्ती हैं। इनमें से भी 40 मरीज तो वे हैं जो कि अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आते हैं और कुछ घंटे बाद चले जाते हैं। यानी कि अस्पताल में पिछले दिनों में औसतन केवल 450 मरीज ही भर्ती रहते हैं।

अब जबकि यहां रोजाना 650 बेड खाली रहते हैं तो आमजन के लिए किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आ रही है। कमोबेश यही स्थिति जयपुरिया अस्पताल की है और यहां केवल 40 बेड पर ही मरीज हैं। इन मरीजों को आसानी से आरयूएचएस शिफ्ट किया जा सकता है ताकि अन्य बीमारियों के मरीजों को यहीं इलाज मिल सके।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि जयपुरिया अस्पताल में इन 40 से 50 मरीजों के लिए करीब 150 का स्टाफ लगा है जो कि काफी अधिक है। यदि इस अस्पताल को नॉन कोविड किया जाए तो सैंकड़ों उन मरीजों को फायदा मिल सकता है जो अन्य बीमारियों से ग्रस्त हैं।
कम हो रहे गंभीर रोगी

  • जरा से लक्षण आते ही लोग कोरोना की समय पर जांच कर रहे हैं। समय पर दवा लेने लगे हैं रिकवर हो रहे हैं।
  • अधिक तबीयत खराब होने से पहले ही अस्पताल में पहुंच रहे हैं और ऑक्सीजन और अन्य दवाएं मिलने लगती हैं। बचाव हो रहा है
  • डॉक्टर्स को काफी अधिक अनुभव हो चुका है और वे मरीज को देखते ही गंभीरता समझ जाते हैं और उसी के अनुरूप इलाज चलता है।
  • एचआरसीटी व अन्य जांचों से गंभीरता का शुरू में ही पता चल रहा है और आमजन को बेहतर इलाज मिल रहा है।

आईसीयू में भी बेड खाली : आरयूएचएस में 140 आईसीयू बेड में से 68 बेड पर मरीज हैं। 7 दिन पहले तक 120 बेड भरे थे। डॉक्टर्स का कहना है- जिस तरह से गंभीर मरीजों की संख्या कम हुई है, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में होगी। आरयूएचएस में जहां रोजाना 250 तक की ओपीडी हुआ करती थी, वह अब घटकर 100 तक रह गई है।

एक्सपर्ट व्यू; पोस्ट कोविड का ध्यान रखें

कोरोना वायरस से पॉजिटिव नेगेटिव होने के बाद खुद को पूर्ण स्वस्थ ना समझें, पोस्ट कोविड केयर बहुत ज्यादा जरूरी है। पॉजिटिव से ठीक होने के बाद कई लोगों में सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान, हल्का बुखार, जोड़ों में दर्द और उदासी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। करीब 80 फीसदी लोगों में ऐसा ही कोई ना कोई लक्षण दिखाई दे रहा है।

जिस व्यक्ति में कोविड का संक्रमण जितना अधिक होता है, उतने ही ज्यादा पोस्ट कोविड लक्षण उसमें देखने को मिल रहे हैं। कोविड पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम हुई है। गंभीर मरीज भी कम हुए हैं। इसकी वजह जागरूकता, सख्ती और समय पर इलाज लेना है। मॉस्क और सोशल डिस्टेंसिंग का काफी फर्क पड़ा है, लेकिन कोरोना को खत्म करने के लिए अभी भी बहुत अधिक जागरूकता की जरूरत है।
एक्सपर्ट पैनल- डॉ. प्रवीण मंगलूनिया, डॉ. कपिल खिप्पल, एसएमएस श्वास रोग संस्थान के सीनियर प्रोफ़ेसर, डॉ. एम.के. गुप्ता, पल्मोनॉलिस्ट, नमित सोनी, डायरेक्टर सोनी हॉस्पिटल।



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650 beds out of 1200 in RUHS, now Kovid can be made free to Jaipuria
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