बजट 2019-20 में ऑटोटीपर का कोई प्रावधान नहीं था, जबकि नगरपरिषद ने इनकी खरीद के टेंडर भी इसी बजट अवधि में लगाए। इतना ही नहीं 64 ऑटाे टिपर खरीद भी लिए गए। यह बात पार्षदाें ने मंगलवार काे एडीएम प्रशासन की बताई। पूर्व पार्षद पवन गाैड़, नेता प्रतिपक्ष बबीता गाैड़, पार्षद विजेंद्र स्वामी, सुशील चाैधरी आदि ने बयान दर्ज करवाते हुए बताया कि आयुक्त के विरुद्ध ठेकेदारों से 4 करोड़ से अधिक के मामले में ठेकेदारों से गलत शपथ पत्र लिए जा रहे हैं। इस मामले में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं की और टेंडर निरस्त कर दिए। इसी तरह यूआईटी क्षेत्र में नियम विरुद्ध सफाई कार्य नहीं करवाने के आदेश जारी किए, जबकि नगरपरिषद क्षेत्र में ही सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं है।
पवन गाैड़ ने बताया कि उपापन समिति की ओर से ऑटाे टिपर खरीद मामले में टिप्पणी की गई थी कि बजट नहीं है। यह ऑटोटीपर बिना छूट एवं बिना बिड के खरीद किए गए हैं। इतना ही नहीं टेंडरों को जानबूझ कर 8 जोन में बांटा गया जो नियमों में ही नहीं है। पार्षदों ने आयुक्त के खिलाफ की गई करीब दर्जन भर शिकायतों के मामले में अपने बयान दर्ज करवाए हैं।
17 सीसी चार्जशीट मामले में आज बयान हाेंगे : पवन गाैड़ ने बताया कि पार्षदाें की ओर से की गई शिकायत पर प्रशासन ने आयुक्त से कई बार जवाब मांगा। लेकिन आयुक्त ने प्रशासन के निर्देशाें की पालना नहीं की है। आज तक एक भी शिकायत का जवाब नहीं दिया गया है। इस पर कलेक्टर ने आयुक्त काे 17 सीसी नाेटिस जारी किया था। उक्त प्रकरण पर बुधवार काे बयान के लिए बुलाया गया है।
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