प्रदेश में काैओं की माैताें का सिलसिला बढ़ते हुए उदयपुर के करीब पहुंच गया है। साेमवार काे यहां 100 किमी दूर निंबाहेड़ा की एक सीमेंट फैक्ट्री में 12 काैओं की मौत हाे गई। पशु पालन विभाग ने इनके सैंपल भोपाल भेजे हैं। इसके बाद वन विभाग और पशु पालन विभाग ने अलर्ट जारी कर नदी, तालाब और झीलों में चेकिंग शुरू कर दी। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर काैओं की मौतें बर्फ फ्लू के कारण हाे रही है ताे यह चिंताजनक है, क्योंकि ये कम आवासीय क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं, जिससे मनुष्य में भी यह फैल सकता है।
सीसीएफ रामकरण खेरवा ने बताया कि संभाग में निंबाहेड़ा के अलावा कहीं भी काैओं के मौत का मामला सामने नहीं आया है। फिर भी 10 से ज्यादा टीमें वॉटर बाॅडी, जंगल और पक्षियों के मूवमेंट की जगह चेकिंग करने जा रही है। इन टीमों में वनकर्मी, रेंजर से लेकर डीएफओ तक शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट शाम काे मुख्यालय भेजते हैं।
सामान्य स्थिति में भी हर माह भेजते हैं 20 सैंपल : खेरवा ने बताया कि उदयपुर में पशु पालन विभाग में लैब है, जहां बर्ड फ्लू की जांच नहीं हाेती है, लेकिन सैंपल कलेक्शन किया जा रहा है। बर्ड फ्लू की जांच भोपाल स्थिति राष्ट्रीय लैब में की जा रही है। सामान्य स्थिति में भी यहां से हर माह पक्षियों के 20 सैंपल भेजे जाते हैं।
क्या हाेता बर्ड फ्लू, कैसे फैलता है
वन्य प्राणियों से मनुष्य में फैलने वाले राेग काे बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा कहते हैं। पक्षी घातक इन्फ्लूएंजा वायरस काे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं। यह वायरस पक्षियों की लार के स्राव और बीट में पाया जाता है। पक्षियों में संक्रमण के लक्षण 3-5 दिन में दिखते हैं। देश में पहली बार बर्ड फ्लू वर्ष 2005 में आया और 2006 में इसका दायरा बढ़ता गया। प्रदेश में यह पहली बार हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में काैओं की मौत हुई।
लक्षण : अधिक संख्या में पक्षियों की माैत, पक्षी सुस्त होकर खाना-पीना बंद कर देते। अंडा उत्पादन में कमी, सिर-गर्दन में सूजन।
बचाव : कौओं को आवासीय इलाके ज्यादा पसंद हैं। ये हमारे आसपास छत पर और पेड़ों पर रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का पक्षी घर की छत या आस-पास मृत दिखे ताे पास न जाएं और न ही छुएं। पक्षियों की बीट या उनकी उपस्थिति हाे ताे दस्ताने और मास्क पहनकर हटाएं। साबुन से हाथ धोएं।
पक्षी मृत दिखें तो मो. नं. 7742825522, 7742825522 पर कॉल करें
काैओं या अन्य पक्षी मृत दिखे ताे इसकी जानकारी वनपाल लालसिंह पंवार के मोबाइल नंबर 7742825522 और वनरक्षक तेजकरण गाडरी के मोबाइल नंबर 9694260579 पर दी जा सकती।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें