प्रदेश की जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्काॅम में फिलहाल विधायकों व नेताओं की सिफारिश पर इंजीनियरों के तबादले नहीं होंगे। तीनों सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों ने तबादलों से बिजली सप्लाई व बिलों की वसूली प्रभावित होने की दलील देते हुए ट्रांसफर करने से इंकार कर दिया है।
जोधपुर डिस्काॅम के एमडी अविनाश सिंघवी व अजमेर डिस्काॅम के एमडी वीएस भाटी का कार्यकाल फरवरी में पूरा हो रहा है। ऐसे में दोनों की प्रबंध निदेशकों का कार्यकाल दूसरी बार भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार का कहना है कि डिस्काॅम्स में बिजली सप्लाई व रेवन्यू वसूली का इश्यू होने के कारण फिलहाल ट्रांसफर नहीं करने का फैसला किया है।
प्रबंध निदेशक नहीं चाहते राजनीतिक दखल
प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद दो साल पहले ही तीनों प्रबंध निदेशकों ने बिजली सप्लाई व टेक्निकल स्तर पर इंजीनियर लगाए थे। लेकिन अब विधायक व दूसरे नेता इनमें से कुछ इंजीनियरों का हटाना चाहते है तथा अपनी पसंद के एईएन व एक्सईएन लगवाना चाहते है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश मेंं बिजली छीजत 15 फीसदी तक लाने व रेवन्यू वसूली के निर्देश दे रखे है। ऐसे में प्रबंधन अपने हिसाब से ही इंजीनियरों को पोस्टिंग करना चाहता है।
बिजली और जलदाय में हुए 833 तबादले
ऊर्जा व जलदाय मंत्री बीडी कल्ला के निर्देश के बाद पिछले चार दिन में 833 तबादले हुए। जलदाय विभाग में 329 और सरकारी बिजली कंपनियों में 504 से ज्यादा इंजीनियरों के तबादले हुए। बिजली प्रसारण कंपनी में ही 401 से ज्यादा ट्रांसफर हुए है। बिजली उत्पादन कंपनी में 103 इंजीनियरों की बदली हुई है।
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