सरकारी नौकरी, मोटी तनख्वाह, फिर भी पैसों का ऐसा लालच कि बिना रिश्वत के काम करने को तैयारी नहींं। सरकारी विभागों में यह आम बात हो गई है। नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार फैला है। थानों से लेकर बैंकों तक में कोई भी काम बिना पैसे दिए नहीं हो रहे हैं। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी बिना रिश्वत के आम जनता से सीधे मुंह बात तक नहीं करते। ऐसे में कुछ लोग रिश्वत देकर काम निकलवा लेते हैं, लेकिन जो लोग रिश्वत नहीं देना चाहते हैं वे एसीबी को शिकायत करते हैं। एसीबी घूसखोरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन भ्रष्टाचार बाज नहीं आ रहे हैं।
काेटा एसीबी में ऐसे ही तीन और मामले दर्ज किए हैं। एसीबी के एएसपी ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि ये तीनाें वे मामले है, जिनमें रिश्वत की मांग प्रमाणित हाे गई थी, लेकिन किन्हीं कारणाें से ट्रैप नहीं हाे सके। बीते साल के अंत में ये तीनाें एफआईआर एसीबी मुख्यालय ने दर्ज की है, जो अब हमें प्राप्त हुई है। इन तीनों में रिश्वत की मांग के हमारे पास पर्याप्त सबूत है।

एफआर लगाने के लिए मांग डेढ़ लाख रुपए

1. एफआर लगाने की एवज में विज्ञान नगर थाने के तत्कालीन एएसआई हजारी लाल, हैड कांस्टेबल रामप्रताप सिंह राजावत तथा एडवाेकेट बाबूलाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। इस मामले में तत्कालीन सीआई नीरज गुप्ता व एएसआई लक्ष्मीनारायण की भूमिका संदिग्ध है, जो जांच से स्पष्ट हो सकेगी। एएसपी चंद्रशील ने बताया कि 18 जनवरी 2019 को परिवादी पूजा राठौड़ एवं सह परिवादी सुमित श्रीवास्तव ने परिवाद देकर बताया कि अमृतम हाॅस्टल के मालिक राकेश कुमार से 31 मार्च 2019 तक 20 लाख में लीज पर लिया। उसे राकेश को 17.95 लाख रुपए दे दिए थे तथा आने वाले वर्ष में लीज अवधि बढ़ाने को कहा।

इसके बावजूद वह हाॅस्टल खाली करवाना चाह रहा है। इसके बाद राकेश सिंघल ने अपने मैनेजर प्रकाश व्यास से कहकर मेरे तथा मेरे परिचित सुमित श्रीवास्तव एवं अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध विज्ञान नगर थाने में मामला दर्ज करवा दिया। इस मामले में विज्ञान नगर के सीआई नीरज गुप्ता समझौता करने तथा प्रकरण में एफआर लगाने के नाम पर वकील बाबूलाल, एएसआई लक्ष्मीनारायण, हैड रामप्रताप सिंह राजावत आदि के जरिए रिश्वत मांग रहे हैं। एसीबी द्वारा शिकायत के सत्यापन कराया, जो सही पाई गई।

कब्जा छुड़ाने को एसएचओ ने मांगे 50 हजार

2. जमीन से कब्जा छुड़वाने की एवज में रिश्वत मांगने के आराेप में एसीबी ने बारां जिले के अंता थानाधिकारी उमेश मेनारिया, कांस्टेबल रवि, वकील भगवान दाधीच व एएसआई बृजबिहारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एएसपी ने बताया कि 2 नवंबर 2019 को परिवादी महेंद्र कुमार व सह परिवादी रविशंकर ने एक शिकायत दी कि पलायता में 5 बीघा जमीन 2019 में बालमुकुंद से खरीदी थी जिसके चचेरे भाइयों ने उक्त जमीन पर कब्जा कर ज्वारे से खेती करने लगे और फसल काटने लगे। समझाइश की तो उन्होंने कहा कि तुझे जान से मार देंगे।

जमीन के कागज अंता थानाधिकारी उमेश मेनारिया काे दिखाए ताे उन्हाेंने दोनों को बुलाया और कहा कि तुम्हारी जांच रवि कांस्टेबल को दे दी है, उससे संपर्क कर लो, जो वह कहे वैसा कर देना तुम्हारा काम हो जाएगा। हमने रवि कांस्टेबल से संपर्क किया तो उसने रविशंकर को अलग बुलाकर कहा कि सीआई साहब ने 50 हजार रुपए मांगे हैं, तुम्हारी जमीन से अवैध कब्जा हटवा देंगे।

उक्त शिकायत पर गोपनीय सत्यापन करवाया गया ताे शिकायत की पुष्टि हुई। इसके बाद ट्रैप का प्रयास किया, लेकिन ट्रैप नहीं हाे सके। जांच से सह परिवादी रविशंकर व आरोपी उमेश मेनारिया, कांस्टेबल रवि, वकील भगवान दाधीच को 50 हजार की मांग करना पाया गया।

3. केसीसी लाेन दिलाने की एवज में बैंककर्मी ने मांगे 40 हजार

केसीसी लाेन दिलाने की एवज में बूंदी जिले के केशवरायपाटन के एक बैंककर्मी के खिलाफ एसीबी में एफआईआर दर्ज की गई है। एएसपी ने बताया कि 7 सितंबर, 2020 को परिवादी गुलाबचंद ने शिकायत दी कि मेरे पिता धन्नालाल ने वर्ष 2011 में एसबीआाई बैंक शाखा केशवरायपाटन बूंदी से केसीसी लोन ले रखा था।

उनका देहांत वर्ष 2018 में हो गया था। मेरे पिता ने उक्त लोन की मूल व ब्याज आदि की किस्तें जमा नहीं करवाई थी, जिससे उनका खाता डिफाॅल्टर हो गया था। लेकिन अब जमीन मेरे नाम होने से मुझे केसीसी लोन की आवश्यकता पड़ी तो 26 अगस्त 2020 को बैंक मैनेजर से मिला, उन्होंने बैंककर्मी अमित मीणा से मिलने काे कहा।

अमित ने मेरे से पिताजी की केसीसी का नोड्यूज दिलाने तथा मेरा नया खाता खुलवाने व केसीसी लोन दिलाने की एवज में 40 हजार रुपए मांगे। जिसमें से 20 हजार रुपए परिवादी दे चुका था और शेष 20 हजार के लिए वह बार-बार परिवादी काे काॅल कर रहा था। मामले में एसीबी सीआई अजीत बागड़ाेलिया की टीम ने आराेपी की मांग का सत्यापन कर लिया, लेकिन शातिर बैंककर्मी परिवादी को टालता रहा और रिश्वत राशि नहीं ली।



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Government job, big salary, yet money greed that demands bribe to work
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