प्रदेश में अपना खाता, ई-गिरदावरी, कृषि ऋण रहन पोर्टल, ई-रजिस्ट्रेशन व ई-नामांतरकरण सहित अन्य राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं होने के मामले में राजस्व विभाग व भूप्रबंधन विभाग ने दो सप्ताह पहले संज्ञान लिया था। लेकिन अब भी सिस्टम में सुधार नहीं हुआ है। राजस्व मंत्री हरीश चौधरी व राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव आनंद कुमार ने अधिकारियों को सिस्टम सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब भी पहले के सामान ही सर्वर डाउन व अपडेट नहीं होने की समस्या है।

लोगों की शिकायतें है कि ऑनलाइन सिस्टम की आड़ में तहसीलदार व नायब तहसीलदारों की मनमर्जी बढ़ गई है। रेवेन्यू रिकॉर्ड में हेराफेरी व फेरबदल की शिकायतें बढ़ गई है। पटवारी व तहसीलदार मनमर्जी से रिकॉर्ड अपडेट करते है। जिन मामलों में गफलत करना होता है, उसे सर्वर डाउन होने का बहाना कर पेडिंग में डाल देते है। भूप्रबंधन विभाग के आयुक्त रोहित गुप्ता का कहना है कि रेवन्यू रिकॉर्ड को अपडेशन करने का बड़ा मामला है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जहां कही भी दिक्कत आती है, वहां पर सुधार करवा रहे है। इसके लिए टेक्निकल टीम भी लगा रखी है। तहसीलकर्मियों की सहायता के लिए हेल्पडेस्क लगा रखी है।

सटीकता का दावा, फील्ड में गफलत
प्रदेश में 15 अक्टूबर को प्रथम राजस्व दिवस पर राजस्व रिकॉर्ड की कम्प्यूटर प्रति को ही सत्य-प्रति मानने तथा ई-हस्ताक्षर को कानूनी वैधता देने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की थी। ताकि किसानों को फायदा हो। इसके साथ ही राजस्व विभाग की सेवाओं के ऑनलाइन होने से अधिकारियों के काम में दक्षता और सटीकता आने का भी दावा किया था।

लेकिन सिस्टम अपडेट नहीं होने और सर्वर डाउन होने के कारण आम जनता को परेशानी हो रही है। लोग जब पटवारी या तहसीलदार से रिकॉर्ड मांगते है तो वो ऑनलाइन होने की दलील देकर पल्ला झाड़ लेते है। जबकि ई-मित्र या अन्य सेवाओं पर लोगों को दस्तावेज व रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है।



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