नरेन्द्र जैन धर्म के साथ साथ शिक्षा और संस्कार की अलख जगा रहे है – मूलसिंह राजपुरोहित  
बाड़मेर। ASO News Barmer 
डोला डूंगरी स्थित मां संच्चियाय मंदिर पर मां संच्चियाय युवा परिषद् एवं मां संच्चियाय मंदिर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान मे धार्मिक स्तवन भजन प्रार्थना गीत लिखो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमे सभी तीन वर्गों से 100 बच्चों ने भाग लिया। 
परिषद् के प्रतियोगिता मुख्य संयोजक नरेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि रविवारीय प्रतियोगिता श्रृंखला में 123 वीं रविवारीय प्रतियोगिता का लाभ वरिष्ठ अध्यापक मूलसिंह राजपुरोहित लंगेरा पुत्रश्री उदयसिंह जी राजपुरोहित परिवार ने अपने पुत्र डॉ संजयसिंह के डॉक्टर बनने एवं सगाई संबंध होने के उपलक्ष्य में लिया। लाभार्थी परिवार से मूलसिंह राजपुरोहित लंगेरा को स्मृति चिन्ह प्रदान कर परिषद् द्वारा अभिनंदन किया गया। 
निर्णायक वरिष्ठ अध्यापक मूलसिंह राजपुरोहित लंगेरा, छगनलाल बोथरा, और मीना वडेरा ने धार्मिक स्तवन भजन प्रार्थना गीत लिखो प्रतियोगिता का परिणाम जारी किया। सभी विद्यार्थियों का अच्छा प्रयास रहा। प्रतियोगिता में विभिन्न वर्गों से 9 मुख्य विजेताओं एवं 8 बच्चों को विशेष सांत्वना से पुरस्कार देकर नवाजा गया। जिन्हें राजपुरोहित परिवार द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता का सफल संचालन नरेन्द्र श्रीश्रीमाल विनय द्वारा किया गया।

धार्मिक गीत स्तवन भजन प्रार्थना लिखित प्रतियोगिता में प्रथम वर्ग कक्षा 3 से 4 प्रथम पुरस्कार दिव्या खींची द्वितीय पुरस्कार देवांश आचार्य तृतीय पुरस्कार दर्शना मेहता विशेष सांत्वना पुरस्कार जतिन खिची, तेजल बोथरा कक्षा 5 से कक्षा 7 द्वितीय वर्ग में प्रथम पुरस्कार हंसिका छाजेड़ द्वितीय पुरस्कार एकता आचार्य  तृतीय पुरस्कार यशिका सोनी विशेष सांत्वना पुरस्कार परी बोथरा, दिया आचार्य, इशिता आचार्य कक्षा 8 से ऊपर तृतीय वर्ग में प्रथम पुरस्कार मेघना आचार्य,  द्वितीय पुरस्कार लता राठौड़ तृतीय पुरस्कार नव्या सिंघवी सांत्वना पुरस्कार हार्दिक वडेरा, मानवी राठौड़, इशिका सिंघवी आदि को लाभार्थी सिंघवी परिवार द्वारा विजेताओं को देकर पुरस्कृत किया गया।
विजेताओ को लाभार्थी राजपुरोहित परिवार द्वारा पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया।

प्रतियोगिता के लाभार्थी एवं निर्णायक मूलसिंह राजपुरोहित लंगेरा ने कहा कि धार्मिक प्रतियोगिताएं मुख्य रूप से धर्म, आध्यात्मिकता, और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जाती हैं। आज प्रतियोगिता गीत स्तवन भजन प्रार्थना लिखो  के संदर्भ में आयोजित हुई। बच्चो का रुझान हमारी लोक संस्कृति, धर्म के प्रति कैसे बढ़े? ऐसा प्रयास देखने को मिला। माँ संच्चियाय के दरबार में हर रविवार को होने वाली प्रतियोगिता माँ संच्चियाय युवा परिषद द्वारा संयोजक नरेंद्र जैन के निर्देशन में आयोजित की जाती है जो कि बालक बालिकाओ को एक रचनात्मक एवं सृजनात्मक मंच प्रदान करता जिससे इनमें भविष्य में ऐसी प्रतियोगिता में भाग लेने का उत्साह बना रहता है एवं मां के दरबार में यह प्रतियोगिता होने से बालकों में धार्मिक प्रवृति भी बनी रहती है। पूरा ग्रुप साधुवाद का पात्र है। निःसंदेह आज मुझे बेहद खुशी है कि मेरे मित्र नरेन्द्र जैन मां संच्चियाय के प्रांगण में धर्म के साथ साथ शिक्षा और संस्कार की अलख जगा रहे है। 
मुख्य संयोजक नरेन्द्र जैन विनय ने बताया कि बच्चों ने धार्मिक स्तवन भजन प्रार्थना गीत आदि लिखे। दीवाना हु महाकाल का, ये है पावन भूमि, श्रीरामजी की गली तुम जाना, कर लो सवेरा हर लो अंधेरा, नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा,  श्याम तुझसे मिलने का सत्संग ही बहाना है, ज्योति जला निज प्राण की बाती गढ़ बलिदान की, पार्श्व जीर्णदा वामाजी के नंदा, तारा मस्त गुलाबी गाल, तारी आँखों छे अनियाली, दादा आदेश्वर जी दूर थी अव्यो, हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिये, साँसों की माला पे सिमरू मैं शिव का नाम आदि को बेहद सुंदर लेखनी एवं विभिन्न रंगों का उपयोग करते हुवे लिखा। धार्मिक प्रतियोगिताओं के आयोजन से बच्चों के जहन में धर्म के बीज का प्रस्फुटन होता है। उसका धर्म के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ता है।

प्रतियोगिता के दौरान उदयसिंह जी राजपुरोहित, सुआ देवी, मूलसिंह राजपुरोहित, रेखा कंवर, सूरज सिंह, मीना वडेरा, छगनलाल बोथरा, पुजारी तनसुख जोशी आदि उपस्थित रहे।

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