डीएसपी भगवत सिंह हिंगड़ ने बताया कि अभी तक की पुलिस जांच में यह सामने आया है कि गौरव मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वो दिल्ली में कैब चलाता है। उसके जीजा नीरज ने पिछले दिनों लग्जरी कार खरीदी थी, जिसे गौरव व उसका भाई चड़ीगढ़ से चलाकर कोटा लाए थे।
गौरव का भाई तो वापस चला गया और गौरव कुछ दिन के लिए यहीं रुक गया। इसी दौरान लॉकडाउन लग गया और वो वापस नहीं जा सका। गौरव ने नीरज से पिछले दिनों काम करने के लिए कुछ रूपयों की डिमांड की थी। नीरज ने उसे 10 हजार रुपए दिए भी थे। गौरव 10 हजार के बाद भी 30 हजार रुपए मांग रहा था। लेकिन, नीरज ने ज्यादा पैसे देने से इनकार कर दिया था क्योंकि उस वक्त उसके पास भी पैसे नहीं थे। इसी बात को लेकर उसने मासूम भांजों की हत्या का प्रयास किया। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है, जिसमें पूरे तथ्य सामने आ सकेंगे।
आरोपी ने दो बार किया आत्महत्या का प्रयास
वारदात के बाद गौरव ने पहले भीड़ देखकर गौरव ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। उसने खुद का गला काटकर जान देने का प्रयास किया। नाकाम रहा तो पंखे से भी लटकने का प्रयास किया। इसी दौरान आर्मी के जवान मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गेट तोड़कर गौरव को बाहर निकाला और अस्पताल में भर्ती कराया
पहले बहन पर हमला किया, फिर भांजों का गला रेता, भागने में नाकाम रहा तो खुद
गौरव शुक्रवार को वापस जाने वाला था क्योंकि उसका टिकट था। पैसे नहीं देने पर गौरव गुस्से में था और उसने गुरुवार को नीरज के ऑफिस जाने के बाद पहले संजना से मारपीट की। संजना के हाथ पर चोट के निशान हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी क्लीयर हो गया है कि संजना घर के बाहर पड़ोसियों से बात करने नहीं बल्कि गौरव से बचकर गई थी। संजना बाहर गई तो गौरव ने अंदर बच्चों को अकेला पाकर गुस्सा निकाला और उनका गला रेतकर हत्या का प्रयास किया।
5 साल के निकुंज ने बहादुरी दिखाकर कुंडी खोल दी
सिपाही नीरज सिंह के 5 वर्षीय बेटे निकुंज के साहस और सूझबूझ ने आराेपी गाैरव के इरादाें काे नाकाम कर दिया। उसकी सूझबूझ ने अपनी और अपने 2 साल के भाई की जान बचाई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावर मामा गौरव (25) ने दोनों भांजों निकुंज और क्वान पर हमला करने के पहले घर का गेट बंद कर लिया था, ताकि दोनों की आसानी से हत्या कर सके। गौरव ने पहने निकुंज पर हमला किया। गाैरव ने निकुंज काे मरा जानकर दूसरे कमरे में जाकर क्वान पर हमला कर दिया। इसी वक्त खुन में लथपथ 5 साल के निकुंज ने बहादुरी दिखाई। उसने कुर्सी पर चढ़कर मेन गेट खोल दिया और शाेर मचाया, जिससे उसकी मां घर में आ गई। इसके बाद गौरव ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। मां ने पिता व अन्य को सूचना दी और तभी वहां तैनात आर्मी के जवान भी पहुंच गए और दोनों बालकों को घायल अवस्था में समय रहते अस्पताल ले गए। निकुंज अगर बहादुरी दिखाकर गेट नहीं खोलता तो अंदर क्या हो रहा है..? किसी को पता नहीं चलता और तब तक दोनों की खून बहने से दाेनाें भाइयाें की मौत भी हो सकती थी।
वारदात स्थल पर जाने वाले डीएसपी हिंगड़ की जुबानी जानें
क्राइम सीन देखकर लगा बच्चे अब नहीं बच सकते, अस्पताल गया तो मासूम चेहरों को देखकर कलेजा कांप गया
'' मैं ऑफिस में रूटीन काम कर रहा था और तभी सूचना आई कि आर्मी एरिया में कोई चाकूबाजी हुई है। रास्ते में पता चला, दो मासूम बच्चे हैं। मौके पर पहुंचा तो घर के बाहर तक खून फैला हुआ था। अंदर कमरे, रसोई, पोर्च समेत हर हिस्से में खून ही खून था। इस दिल दहला देने वाले सीन को देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि अब बच्चे किसी भी सूरत में बचने वाले नहीं हैं। मन में भगवान से दोनों बच्चों की सलामती की प्रार्थना की और एक लंबी सांस लेने के बाद जांच-पड़ताल में जुट गया। क्वार्टर के बाहर एक सिलेंडर रखा था, जिसका वॉल्व खुला था। मुझे आश्चर्य हुआ, जब पूछा तो पता चला कि आरोपी ने वाॅल्व खोल दिया था और घर में गैस भरने लगी थी। निकुंज की मां संजना एक हाथ में छोटे बच्चे को लेकर दूसरे हाथ से सिलेंडर को रसोई से खींचकर बाहर लाई थी ताकि घर सुरक्षित बचा रहे। किसी भी वजह से सिलेंडर में अाग लग जाती ताे बड़ा हादसा हाे सकता था। मां-बेटे की हिम्मत पर गर्व भी हो रहा था और बच्चों की चिंता भी हो रही थी। ''
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