कस्बे का बेहलीम परिवार कोरोना योद्धाओं के रूप में चिकित्सा जगत के सामने मिसाल बनकर सामने आया है। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. यासीन बेहलीम कोरोना महामारी के दौरान निरंतर पशुओं की सेवा कर रहे हैं, वहीं उनके बड़े पुत्र आसिफ बेहलीम पटना मेडिकल कॉलेज में प्रथम श्रेणी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में तथा द्वितीय पुत्र डॉ. जैनुल आबेदीन पाली के बामसेरा-सुमेरपुर पीएचसी में कोविड प्रभारी हैं। डॉ. जैनुल की मंगेतर डॉ. समरीन मेडिकल कॉलेज उदयपुर में सेवाएं दे रही हैं, वही सबसे छोटे पुत्र डॉ. हाफिजुर रहमान जॉर्जिया के तबलीसी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ कोरोना फाइटर के रूप में काम कर रहे हैं।
डॉ. यासीन बेहलीम के भतीजे डॉ. तैयब आबिद जोगेश्वरी मुंबई के मिल्लत हॉस्पिटल में शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कोरोना महामारी में निरंतर सेवा दे रहे हैं। डॉ. बेहलीम के तृतीय पुत्र अब्दुल कादिर रामगढ़ में कोरोना महामारी के दौरान जरूरतमंदों को घर-घर जाकर भोजन और राशन के पैकेट बांटते हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. यासीन बेहलीम के पिता के 10 अप्रैल को इंतकाल के दौरान भी उनके चारों पौतों ने कोरोना के दौरान मरीजों का इलाज लगातार जारी रखा तथा अपनी मातृभूमि रामगढ़ नहीं आए। सभी तीन महीनों से मरीजों की सेवा में जुटे हैं।
कोरोना राेगियाें काे अवसाद से बचा रहे हैं डाॅ. मिश्रा, कहते हैं डरें नहीं, मुकाबला करें
श्रीमाधोपुर | कोरोना अपने साथ मानसिक अवसाद का खतरा भी लेकर आया है। सरकार ने मानसिक रोग विशेषज्ञों को इस अवसाद से मरीजों को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हीं विशेषज्ञों में से एक है श्रीमाधोपुर निवासी डॉ. महेश मिश्रा। डॉ. मिश्रा एसएमएस मेडिकल हॉस्पिटल में मनोचिकित्सक हैं। उनकी कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी है, जहां वे अपनी जान जोखिम में डालकर भर्ती पॉजिटिव मरीजों से बातचीत कर उनकी बदलती मनोदशा का आंकलन कर अवसाद, अनिद्रा, एंजाइटी, पेनिक अटेक्स आदि का उपचार कर रहे हैं।
इसी के साथ डॉ. मिश्रा राज्य सरकार द्वारा बनाए गए संस्थागत क्वारेंटाइन केंद्रों जिनमें कोरोना से संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए संबधियों, परिजनों को रखा गया है, उनमें कोरोना के भय के कारण उनकी नींद व भूख में आए बदलावों, असुरक्षा की भावना, अनिश्चितता की भावना, चिंता, घबराहट, बैचेनी, डर लगना की शिकायतें है, ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग, काउंसलिंग व उपचार में जुटे हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि मुश्किल भरे हालातों में दुखी होना व अवसाद में आना सामान्य बात है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रखें। लक्षणों को समझें एवं सतर्क रहें।
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