आज विश्व पर्यावरण दिवस है। रेगिस्तानी राजस्थान के लिए इस दिन के विशेष मायने हैं। पानी का संकट और हर साल अकाल झेलने वाले राजस्थान के लिए पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों को जिंदा रखना बहुत बड़ी चुनौती भरा है। प्रदेश की कुछ हस्तियां हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और हौसले से मरुस्थल को भी हरियाली में बदल दिया। आइए, आपको राजस्थान के ऐसे ही ट्री मैन, ट्री वूमेन और वन्य जीव व पर्यावरण के रक्षकों से रूबरू करवाते हैं।
पौधों को बच्चा मानती हैं ट्री वूमन
राजस्थान की ट्री-वूमैन नाम से चर्चित अनुपमा तिवाड़ी पिछले पांच साल में 10 हजार से ज्यादा पौधे लगा चुकी हैं। अपने लगाए गए पेड़ पौधों को वे अपना बच्चा कहती हैं तथा बच्चे की तरह ही उनकी देखभाल करती हैं। उनकी डायरी में उनके लगाए गए हर पेड़-पौधे का इतिहास दर्ज है।
रेगिस्तान में लगाए 35 हजार पेड़
77 साल के जोधपुर के एकल खोरी गांव के राणाराम विश्नोई ने अपना पूरा जीवन पर्यावरण के नाम समर्पित कर दिया। पिछले 50 साल में विश्नोई करीब 35 हजार से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं। उन्होंने अपने गांव के आस-पास के पूरे इलाके को हरा-भरा बना दिया। सर पर मटका रखकर रोज पेड़ों को सिंचते है।
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