सर्दी-गर्मी में देशभर में पहचान रखने वाले चूरू शहर में बारिश का मौसम भी आफत से कम नहीं होता। प्यालेनुमा बसावट वाले चूरू में थोड़ी सी बारिश में आधे शहर में सबकुछ बंद हो जाता है। कई मुख्य रास्ते 3 से 6 घंटे तक बंद हो जाते हैं। ये समस्या दशकों से चली आ रही है। डेढ़ लाख की आबादी वाला चूरू ये समस्या हर साल झेलता है।
समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम 7 साल पहले 7 मार्च 2013 को शुरू किया गया, लेकिन करीब 19 करोड़ की लागत से जौहरी सागर में बनाए गए ड्रेनेज कंट्रोल रूम ही सबसे पहले बारिश से घिर जाते हैं। 24 घंटे तक इसके चारों ओर पानी भरा रहता है। भास्कर ने इस समस्या के समाधान के लिए नगर परिषद के मौजूदा एवं पूर्व आयुक्तों से चर्चा की, सबने एक स्वर में कहा कि शहर की बसावट ही ऐसी है, निचले क्षेत्रों में बारिश में पानी भरना स्वाभाविक है। इस समस्या के समाधान के लिए शुरू किया गया ड्रेनेज सिस्टम इसलिए सफल नहीं हो रहा, क्योंकि लोगों में जागरूकता नहीं है।
आए दिन ड्रेनेज के नाले कचरों से बंद होकर ओवरफ्लो हो जाते हैं। यही कारण है कि नगर परिषद को शहर के 5-6 जलभराव वाले स्थानों पर स्थायी तौर पर मोटरें लगानी पड़ रही है, बावजूद इसके वहां बारिश में पानी भरता है। घरों में घुस जाता है। लोग बारिश में घरों में बंद होकर रह जाते हैं।

जलभराव वाले पॉइंट
जौहरी सागर, सुभाष चौक, भाईजी चौक, झारिया मोरी, चांदनी चौक, गांधीनगर कॉलोनी, ओम कॉलोनी, नई सड़क, लोहिया कॉलेज के आगे, कलेक्ट्रेट के पिछवाड़े, पंखा रोड, ताजूशाह तकिया, नानीबाई मरदा, रामगढ़िया दरवाजा, नेत्र अस्पताल के सामने, डीबी अस्पताल के सामने बारिश का पानी भरता है।

ड्रेनेज कंट्रोल रूम ही सबसे पहले बारिश के पानी से घिरता है

जलभराव के 5 बड़े कारण...जिनसे थोड़ी सी बारिश में आधा शहर घरों में कैद हो जाता है

1 ड्रेनेज सिस्टम में खामी... वार्डों की बसावट के अनुरूप भूमिगत नाले नहीं डाले गए। ऊंचाई में नालों के पानी निकासी सही नहीं होती। भाईजी चौक, झारिया मोरी एवं चांदनी चौक में ये स्थिति अक्सर रहती है।
2 घर का पानी सीवरेज में...लोगों ने सीवरेज से घर के पूरे नाले-नालियों को जोड़ दिया। इससे बारिश में घरों का पानी सीवरेज के नाले से ओवरफ्लो होकर सड़क पर आता है।

3 लोगों में जागरूकता नहीं... ड्रेनेज के नालों में लोग कचरा, प्लास्टिक की थैलियां सहित अन्य फालतू सामान डालने से वे अवरुद्ध हो जाते हैं। एक दिन पहले ही सुभाष चौक के नाले से 35 ट्रॉली कचरा निकाला गया।
4 नालों की सफाई नहीं...बारिश से पहले अक्सर नाले-नालियों की सफाई करवाई जाती है, पर नगर परिषद का अभियान कुछेक वार्डों तक रहता है।
5 मॉनीटरिंग का अभाव...नगर परिषद के अधिकारी बराबर मॉनीटरिंग नहीं करते। इधर, पीएचईडी की सप्लाई ट्यूबवैल से 24 घंटे होती है, जिससे व्यर्थ पानी सीवरेज-ड्रैनेज के नालों में समस्या खड़ी करते है।
सीधी बात द्वारका प्रसाद, आयुक्त नगरपरिषद

Q. शहर में पानी क्यों भरता है?
आयुक्त-जलभराव वाले क्षेत्रों में समस्या है। मोटरें लगा रखी हैं।
Q. निकासी का कंट्रोल रूम ही पानी से घिर जाता है? बाजार में रास्ते बंद हो जाते है?
-क्या करें, वहां शहर का पूरा पानी आता है। बारिश के पानी का बहाव का रास्ता ही यही है।
Q. नगर परिषद कोई समाधान क्यों नहीं कर पाती?
-परिषद ने सारे संसाधन झोंक रखे है। लोग भी जागरूक हो। कचरा नालियों में नहीं डाले।



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चूरू. सोमवार को आई बारिश के बाद मंगलवार को भी जौहरी सागर के पास पंखा रोड पर पानी भरा रहा।
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