(शिव प्रकाश शर्मा)कोरोना के दौरान मुख्यमंत्री सहायता कोष के नाम पर एकत्रित की राशि को मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा नहीं कराने के मामले में बस्सी एसडीएम के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है। इस बीच शाहपुरा एसडीएम पर भी जुटाई गई राशि 12 लाख में से सिर्फ ढाई लाख रुपए ही जमा कराने एवं बाकी राशि प्राइवेट बैंक में जमा करवाने का मामला सामने आ गया है।
नियमानुसार जुटाई राशि 24 घंटे में जमा करानी चाहिए थी। इस मामले में शिकायत सीएमओ एवं चीफ सेक्रेटरी तक पहुंची तो संभागीय आयुक्त कार्यालय एवं कलेक्ट्री तक हरकत में आ गई। अब संभागीय आयुक्त एवं कलेक्टर इस मामले में जांच कर रहे हैं।
2 महीने बाद भी जमा नहीं करवाई राशि
संभागीय आयुक्त के सी वर्मा ने बताया कि कोरोना काल में शाहपुरा उपखंड अधिकारी नरेंद्र कुमार मीणा ने मुख्यमंत्री सहायता कोष के नाम पर 12 लाख रुपए से अधिक की राश एकत्रित की थी। यह एकत्रित राशि उन्होंने सहायता कोष में जमा न करवा कर उपखंड अधिकारी शाहपुरा के खाते में जमा करवा दी। मामले की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री सहायता कोष में एकत्रित कर राशि को जमा नहीं करवाना गलत है।
बस्सी एसडीएम के खिलाफ जांच जारी
बस्सी एसडीएम रामकुमार वर्मा ने 32 लाख रुपए एकत्रित किए थे। मामला सामने आने बाद उन्होंने 18 .72 लाख रुपए मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करवा दिए। कलेक्टर डॉ जोगाराम ने नोटिस देकर खर्च की गई राशि का हिसाब मांगा था। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं देने पर फिर से जवाब मांगा है। इस बारे में डिवीजनल कमिश्नर ने मामले की जांच कर कलेक्टर को कार्रवाई के लिए कहा है। उनका कहना है कि इसके अलावा बस्सी एसडीएम द्वारा राशन डीलरों से भी 11-11 हजार रुपये लेने का भी मामला सामने आया है। कलेक्टर का कहना है कि बस्सी एसडीएम को नोटिस जारी किया था। फिलहाल उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हूं और दोबारा जवाब साक्ष्य के साथ मांगा गया है।
कलेक्टर ने कहा 24 घंटे में जमा करवाना जरूरी
जिला कलेक्टर डॉ जोगाराम ने कहा कि नियमानुसार मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए एकत्रित राशि को अधिकारी 24 घन्टे भी अपने पास नहीं रख सकते। उपखंड अधिकारी नरेंद्र मीणा से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है।
एसडीएम शाहपुरा नरेंद्र कुमार मीणा का कहना है कि करीब 12 लाख रुपए एकत्रित हुए हैं, जो सरकारी खाते में जमा है। मुख्यमंत्री सहायता कोष में ढाई लाख रुपया और प्रधानमंत्री सहायता कोष में 51 हजार रुपए जमा करवाए जा चुके हैं। अब तक जो पैसा खर्च हुआ है, उसके भुगतान के लिए कलेक्टर साहब से अनुमति मांगी गई है।
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