कोरोना के चलते लागू लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ना हो इसके लिए स्कूल, ट्यूशन, कॉलेज ने ऑनलाइन क्लॉसेज शुरू की थी। बच्चे लगातार चार-पांच घंटे मोबाइल, नोट्पेड पर क्लासेज अटेंड कर रहे थे।
इससे आंखाें में दर्द, कम दूरी होने पर भी वस्तु नहीं दिखने जैसी समस्याएं होने लगी हैं। आंखाें की ऐसी समस्या को नेत्र विशेषज्ञ मायोपिया बीमारी कहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें भेंगापन, आंखों में तनाव, सूखापन जैसी दिक्क्तें भी देखने को मिली।
एमडीएम के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौहान का कहना है कि चार-पांच घंटे ऑनलाइन क्लॉसेज, इसके बाद माेबाइल पर गेम्स अाैर साेशल मीडिया के लगातार प्रयोग से मायोपिया होने की आशंका रहती है। इससे हल्का भेंगापन, आंखों में सूजन, आंख लाल रहना जैसी समस्या हो सकती है।
राेज 10-12 मरीज ओपीडी में फोन पर लेते सलाह
डॉ. चौहान का कहना है कि आई-ओपीडी में ऐसे 10-12 मरीज रोज आ रहे हैं। इसके अलावा कई पेरेंट्स के भी सलाह लेने काे फोन आते हैं। अस्पताल आने वाले बच्चे आंख में दर्द, धुंधला दिखना, आंखो में पानी आना, लाल होना, चश्मा लगा होने के बाद भी धुंधला दिखना जैसी शिकायत लेकर आ रहे हैं।
आंखाें का ऐसे करें बचाव
- बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें।
- अगर ऑनलाइन स्टडी चल रही है। तो हर 20 मिनट के बाद 20 सैकंड के लिए आंखों को आराम दें।
- स्क्रीन से जितना हो सके, दूर बैठें।
- डॉक्टर के बताए अनुसार आंखों की एक्सरसाइज करें।
- स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हो तो पलकें झपकाना ना भूलें।
पिछले साल 13% बच्चे ग्रसित थे
एम्स की गत साल आई रिपोर्ट में देशभर में करीब 13 प्रतिशत स्कूली बच्चे मायोपिया से ग्रस्त थे। अमेरिका में 30% शिकार है।

यह है मायोपिया
मायोपिया में पास की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई देती। अगर कोई चीज दो से छह मीटर दूर है तो वह धुंधली दिखेगी।
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