( श्याम राज शर्मा )प्रदेश में अब हर कलेक्टर अपने जिले में आने वाले प्रवासी श्रमिकों में हुनर की तलाश करेंगे। इसके लिए कलेक्टर दफ्तर से प्रवासी लोगों को फोन कर उनके पूछा जाएगा कि आप किस काम में माहिर हो। पटवारी व तहसीलदार के जरिए भी प्रवासी श्रमिकों की लिस्ट तैयार होगी। इसके बा बाद हर जिला श्रमिकों की श्रेणी बनाकर श्रम विभाग को यह सूची दी जाएगी। श्रम व रोजगार विभाग ने एक पोर्टल तैयार किया है, इस प्लेटफॉर्म पर कामगार व उद्योगपति-व्यवसायी होंगे। पोर्टल पर काम करने वाले व काम करने वाले अपनी जरूरत के हिसाब से चयन करेंगे। पोर्टल पर 53 लाख स्किल्ड व अनस्किल्ड श्रमिकों के मोबाइल नं. व आधार नंबर होंगे। इसके साथ ही 11 लाख उद्योगपतियों व बिजनेसमैन की पूरी जानकारी होगी।
श्रम विभाग के सचिव नीरज के. पवन ने बताया कि श्रम विभाग व रोजगार कार्यालय ने प्रदेश से सभी 53 लाख ट्रेड व अनट्रेंड लोगों का डाटाबेस तैयार किया है। प्रवासी श्रमिकों की क्षमताओं के बारे में सभी कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है। कलेक्टर इन श्रमिकों के हुनर की जांच पड़ताल कर जानकारी देंंगे। इसके बाद जिसे भी श्रमिक या काम की जरूरत होगी, वह संबंधित पोर्टल पर जाकर उनकी जानकारी व मोबाइल नंबर ले सकेगा।
मॉनिटरिंग करेगा श्रम विभाग
कोरोना संक्रमण के कारण राजस्थानी दूसरे राज्यों में अपना काम धंधा छोड़कर वापस घरों को लौट आए है। सबसे ज्यादा गुजरात और महाराष्ट्र से प्रवासी लौटे हैै। पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों में काम करने वाले ज्यादातर प्रवासी वापस लौट आए है। इनमें कारपेंटर, प्लंबर, सैलून, पेंटर, लोहे के फैब्रीकेशन, हलवाई का काम करते थे। वहीं कई प्रवासी मशीन के साथ ही दुकान चलाने का काम करते थे। अब इन श्रमिकों को काम दिलाने की मॉनिटरिंग श्रम विभाग करेगा।
पोर्टल पर होंगे ये कामगार
प्रवासी श्रमिक : 11 लाख
भवन व संनिर्माण : 23 लाख
आईटीआई : 4 लाख
बेरोजगार पंजीकृत : 11 लाख
आरएसएलडीसी से ट्रेंड: 4 लाख
यह होंगे काम देने वाले
उद्योग आधार वाले उद्योगपति :4 लाख
बिजनेस रजिस्टर व्यवसायी : 7 लाख
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