( सौरभ भट्ट )प्रदेश की सहकारी समितियां अब सूर्य की ऊर्जा से चलेंगी। राज्य सरकार इन सहकारी समितियों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना तैयार कर रही है। सहकारी समितियों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जाने के बाद दोहरा फायदा होगा। एक तो सहकारी समितियां अपनी ऊर्जा खुद उत्पादन करेगी वहीं सरप्लस ऊर्जा को ग्रिड में सप्लाई कर आमदनी भी जुटा सकेंगी।
इसके लिए सहकारिता विभाग ने प्रारंभिक तौर पर 500 सहकारी समितियों को छांटा है। यह योजना इसलिए बनाई गई है ताकि समितियों की ऊर्जा की जरूरत पूरी हो सके साथ ही उन्हें आमदनी के लिए भी नियमत जरिया मिल जाए। जल्द ही आरआरईसी के जरिए टेंडर जारी कर इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें दाे विकल्पाें पर विचार किया जा रहा है। पहला यह कि इसके लिए सरकार समितियाें काे बजट उपलब्ध करवाए और दूसरा यह कि सरकार उन्हें जमीन उपलब्ध करवाए और सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए सीधे समितियों के साथ टेंडर में आने वाली कंपनियों के एमओयू करवाए जाएं।
जीएसएस में सोलर पैनल लगाए जाने को लेकर कमेटी गठित की गई है। पहली बैठक इसी सप्ताह होगी। -पीआर मीना, एमडी अपेक्स बैंक
चार सालाें में 2 हजार समितियाें काे जाेड़ा जाएगा : इस योजना को लागू करने के लिए विभाग के स्तर पर एक कमेटी गठित की गई है। इसमें अपेक्स बैंक एमडी, संयुक्त सचिव प्लानिंग, संयुक्त सचिव नियम, संयुक्त सचिव बैंकिंग और संयुक्त सचिव आरआरईसी को शामिल किया गया है। कमेटी सरकार को अपनी सिफारिशें देगी कि किस तरह सहकारी समितियों को इस योजना से जोड़ा जाए। प्रदेश में करीब 5 हजार 500 सहकारी समितियां संचालित हैं। अगले चार सालों में सरकार चरणबद्ध तरीके से इनमें से 2 हजार सहकारी समितियों को सौर ऊर्जा से जोड़ेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में इनमें से 500 समितियों को चिन्हित किया जाएगा।
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