(प्रणीता भारद्वाज) कोरोना वायरस को कम्युनिटी स्तर पर फैलने से रोकने के लिए एसिम्प्टोमैटिक पेशेंट्स के टेस्ट किए जाएं। इन पेशेंट्स में वायरस लक्षण आने पर एक से छह दिन तक जिंदा रहता है। ये पेशेंट्स अन्य लोगों में वायरस फैला सकते हैं।
स्टडी में 71 परसेंट लोगों को इस वायरस का कैरियर माना गया। इसे नियंत्रित करने के लिए डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए आइसीएमआर ने रेपिड टैस्ट को एप्रूव्ल दिया है। जयपुर के रिसर्चर और एंंड्रोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद गुप्ता ने बताया कि स्टैंडर्ड क्यू कोविड-19 एंटीजन डिटेक्टिव किट से बने इस टैस्ट के जरिए प्राइमरी लेवल पर टैस्ट करके कम्युनिटी लेवल पर इसे फैलने से रोका जा सकता है।
कंटेनमेंट जोन के अलावा एसिम्प्टोमैटिक हाई रिस्क पेशेंटस में यह टेस्ट किया जाना चाहिए। इस टैस्ट की सेंसेटिविटी 90 से 93 परसेंट है। निगेटिव आने पर कंफर्म नहीं करें। पॉजिटिव आने पर आरटीपीसीआर से रिकंफर्म करें।
इन पेशेंट्स में यह टेस्ट किया जाए
हाइपरटेंशन, डायबिटीज और दिल के बीमारी से ग्रसित है, जो कीमोथेरेपी ले रहे हैं। जिनका ट्रांसप्लांट हो चुका है और जिन्हें एचअआईवी है। इसके अलावा 65 साल की उम्र से ज्यादा हार्ट, लंग्स, किडनी, लिवर, न्यूरोलॉजिकल और ब्लड डिसऑर्डर से ग्रसित पेशेंटस। इमरजेंसी न्यूरो, डेंटल सर्जरी, ब्रोक्रोस्कोपी, एंडोस्कोपी और डायलिसिस करवाने वाले पेशेंट्स में यह टेस्ट करवाने के रिकमंड किया गया है।
3 दिन में नजर आते हैं एसिम्प्टोमैटिक लक्षण: डब्ल्यूएचओ ने दुनियाभर में आए केसो के विश्लेषण में पाया कि शरीर में प्रवेश करने के बाद इस वायरस के शुरूआती तीन दिनों में हल्के या एसिम्प्टोमैटिक लक्षण नजर आते हैं। अगले दस दिनों में पूरे लक्षणों सहित यह वायरस शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
इसके बाद प्रभावित व्यक्ति दूसरों में भी इंफेक्शन फैला सकता है। इसलिए लक्षण दिखने पर व्यक्ति रिपोर्ट नहीं आने तक खुद को आइसोलेट करके रखे। कोविड-19 के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने दुनियाभर के केसों का विश्लेषण करके इनका परसेंटेज तय किया है।
लिम्फोसाइट कम होना हाई रिस्क
अगर कोरोना पेशेंट में लिम्फोसाइटस कम और सीआरपी हाई है। उस पेशेंट की डेथ होने की रिस्क ज्यादा है। जयपुर के पेशेंट्स पर हुई एक स्टडी में यह पाया गया। वहीं, दुनियाभर की तरह जयपुर के 83-90 परसेंट पेशेंटस में बुखार पहला लक्षण था। 80 परसेंट में माइल्ड लक्षण देखे गए। जिनकी दो सप्ताह में रिकवरी हो गई। बचे हुए पेशेंट्स में सांस की तकलीफ और निमोनिया था। 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगो की डेथ हुई है।
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