जिले में गुड़ला से श्रीनगर तक रेलवे ट्रैक इलेक्ट्रिफाइड हो चुका है। शुक्रवार को कमिश्नर रेलवे सेफ्टी एके जैन ने इंस्पेक्शन कर इसे हरीझंडी दे दी है। श्रीनगर स्टेशन से गुड़ला तक 110 किमी प्रति घंटा की स्पीड से इलेक्ट्रिक रेल इंजन का स्पीड ट्रायल किया, जो सफल रहा। इसके साथ ही अब कोटा-बूंदी के बीच इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।

हालांकि गुड़ला से चंदेरिया 156 किमी लंबी लाइन करीब 60 फीसदी ही इलेक्ट्रिफाइड हुई है। ऐसे में फिलहाल इस ट्रैक पर यात्री गाड़ियां नहीं चलेंगी, पर बूंदी-कोटा के बीच शुक्रवार को इलेक्ट्रिक इंजन वाली मालगाड़ियां चलाने को हरीझंडी मिल गई है। बूंदी से गेहूं, सोया तेल, खळ सरीखी सामग्री मालगाड़ी से जाती है। अब तक कोटा से गुड़ला तक ही इलेक्ट्रिक लाइन थी।

ऐसे में इलेक्ट्रिक इंजन गुड़ला तक तक आता था, जहां मालगाड़ी में डीजल इंजन जुड़कर बूंदी आता था, इसमें वक्त लगता था। महीने में बूंदी-कोटा के बीच मालगाड़ियां 6 चक्कर लगाती हैं। पहले बूंदी-कोटा के बीच चलनेवाली मालगाड़ी का फिक्स समय नहीं होता था, पर अब समय पर मालगाड़ी आ जाएगी।
सीआरएस अरविंदकुमार जैन ने गुड़ला से श्रीनगर खंड के बीच एलसी गेट, पावर सबस्टेशन, बूंदी और श्रीनगर स्टेशन का निरीक्षण किया। डीआरएम कोटा पंकज शर्मा, मुख्य परियोजना निदेशक रेल (विद्युतीकरण) जयपुर राजेश मोहन, रेलवे जबलपुर के प्रमुख विद्युत इंजीनियर डाॅ. राकेश गुप्ता, उप मुख्य विद्युत इंजीनियर व गुड़ला-श्रीनगर खंड प्रोजेक्ट इंचार्ज जे. कटारिया, वरिष्ठ मंडल अभियंता अभिमन्यु सेठ, उप मुख्य इंजीनियर एमएल मीणा, उपमुख्य संकेत-दूरसंचार इंजीनियर अनुपमकुमार, ग्रीन पावर के प्रोजेक्ट मैनेजर डीके श्रीवास्तव ओर वरिष्ठ अधिकारी साथ थे।

कोटा-बूंदी के बीच इलेक्ट्रिक इंजन वाली मालगाड़ियां शुरू होगी
गुडला से चंदेरिया 156 किमी लंबी लाइन इलेक्ट्रिफाइड होनी है, इसमें गुडला से श्रीनगर तक 40 किमी लाइन इलेक्ट्रीफाइड हो चुकी है, प्रति किमी पर 35 लाख रुपए के हिसाब से 14 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। बाकी 116 किमी लाइन का 50 से 60 फीसदी काम पूरा हुआ है। शुक्रवार को 40 किमी रेलवे ट्रैक का फाइनल ट्रायल किया गया। अब कोटा-बूंदी के बीच इलेक्ट्रिक इंजन वाली मालगाड़ियां शुरू हो जाएगी। अभी गुडला से चंदेरिया 156 किमी का पूरा रूट इलेक्ट्रीफाइड नहीं हुआ है, ऐसे में यात्री ट्रेन फिलहाल नहीं चलेंगी, पर बूंदी-कोटा के बीच इलेक्ट्रिक मालगाड़ियां चलने लगेंगी।

एक मिनट में 110 की स्पीड
खासबात यह है कि डीजल इंजन को 110 किमी की स्पीड पकड़ने में चार मिनट लगते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन एक मिनट में ही यह स्पीड पकड़ लेता है। इलेक्ट्रिक इंजन से पर्यावरण प्रदूषण कम होगा तो डीजल और समय भी बचेगा।



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बूंदी. रेलवे ट्रैक का निरीक्षण करते सीआरएस अरविंद कुमार जैन।
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