डीआईजी का संरक्षण दिलवाने और एसीआर सही कराने के नाम पर उद्योग नगर थाना प्रभारी से 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते जयपुर में पकड़ा गया दलाल प्रमोद शर्मा भरतपुर रेंज में कई थानेदारों से पैसे वसूल रहा था। पुलिसकर्मी होने के नाते किसी को शक न हो और उसका भरोसा जम जाए, इसलिए वह पहला फोन डीआईजी के भरतपुर स्थित आवास पर लगे सरकारी टेलीफोन से ही करता था।
इस मामले में अब सवाल यह उठ रहे हैं कि दलाल प्रमोद डीआईजी के सरकारी आवास पर न केवल आता-जाता रहा बल्कि उनके सरकारी फोन से रेंज में भरतपुर, धौलपुर और सवाई माधोपुर के कई थानेदारों से मांग और अवैध वसूली भी करता रहा। यहां तक कि रिश्वत के 5 लाख रुपए लेने जयपुर भी पहुंच गया। उन्हें इसकी भनक तक नहीं हुई। यह कैसे संभव है?
एसीबी के एडीजी सौरभ श्रीवास्तव के मुताबिक पिछले कई दिन से भरतपुर रेंज में डीआईजी के नाम पर अवैध वसूली किए जाने की सूचनाएं मिल रही थी। थानेदारों को टेलीफोन पर रकम भिजवाने के निर्देश दिए जाते थे। गिरफ्तार दलाल प्रमोद शर्मा खुद को डीआईजी का भाई बताकर अपना परिचय देता था।
डीआईजी निवास के सरकारी फोन से की जाती थी रिश्वत की मांग
श्रीवास्तव के अनुसार अब तक की पड़ताल से पता चला है कि कई जिलों में थाना प्रभारियों से रुपयों की मांग की जाती थी। इनमें से एक एसएचओ चंद्रप्रकाश ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। गिरफ्तार दलाल की डीआईजी भरतपुर स्थित सरकारी आवास में मौजूदगी भी मिली है।
जांच में यह भी तथ्य मिले हैं कि दलाल प्रमोद डीआईजी के भरतपुर स्थित आवास पर लगे सरकारी टेलीफोन से रेंज के थानेदारों को फोन करता था। बाद में उनसे वॉटसएप पर ही बात करता था। डीआईजी से किसी भी तरह का काम कराने का हवाला देकर थानेदारों से रिश्वत मांगी जाती थी। उन्हें फोन कर कहा जाता था कि हमें इतने लाख रुपए की जरूरत है, भिजवाइए।
एसीबी के डीजी आलोक त्रिपाठी के अनुसार रेंज डीआईजी लक्ष्मण गौड की भूमिका के बारे में फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता। गिरफ्तार दलाल से पूछताछ की जा रही है। बयान और सबूतों के आधार पर जो तथ्य सामने आएंगे उनकी कडिय़ां आपस में जोड़ी जाएंगी। इसके बाद ही उनकी भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
सीपी अच्छे अफसरों में, पर विवादित भी रहे
डीआईजी के नाम पर रिश्वत मांगने वाले दलाल को पकड़वाने वाले उद्योग नगर थाना प्रभारी चंद्रप्रकाश को भरतपुर जिले के अच्छे (इंटेलीजेंट) थाना प्रभारियों में माना जाता है। जिले के अधिकांश जटिल मामले सुलझाने में उनकी काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन, वह उतने ही विवादास्पद भी रहे हैं।
शहर के आदर्श नगर इलाके में पिछले दिनों एक महिला की दिनदहाड़े हुई हत्या की जांच के लिए गठित टीम में चंद्रप्रकाश भी शामिल थे। इस टीम ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए कथित तौर पर एक शराबी को गिरफ्तार किया था। लेकिन, उससे न तो माल बरामद हुआ और न ही हत्या में उसकी सीधे तौर पर भूमिका स्पष्ट हो पाई थी।
यहां तक कि इस महिला के परिवार वाले भी इस जांच से संतुष्ट नहीं थे। बाद में हाईकोर्ट से उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। धौलपुर और अन्य जगहों पर भी पोस्टिंग के दौरान भी उनकी कार्य प्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें