कोविड-19 महामारी के बीच ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत दिलाने के लिए सरकार ने मनरेगा के तहत काम शुरू करवाए और इसके लिए नए लोगों को भी जोड़ने की कवायद शुरू की। इस माहौल में भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारी भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसे ही एक ग्राम विकास अधिकारी को एसीबी टीम ने गुरुवार को 1300 रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपी 500 रुपए पहले ही ले चुका था।
डीआईजी (एसीबी) डॉ. विष्णुकांत ने बताया कि फलोदी के निकटवर्ती ग्राम पंचायत बैंगटी खुर्द निवासी खींवसिंह पुत्र जेठूसिंह ने एसीबी (एसयू) के एएसपी दुर्गसिंह राजपुरोहित के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत पेश की थी। इसमें परिवादी ने बताया कि उसके व माता लाछ कंवर, भाई भंवरसिंह व चंदनसिंह के नाम से जॉब कार्ड बनाने की एवज में ग्राम विकास अधिकारी जसवंतराम 1800 रुपए रिश्वत मांग रहा है। इसके दस्तावेज जमा करवाते समय जसवंत राम ने 500 रुपए ले लिए थे।
बुधवार को मिली इस शिकायत पर एएसपी राजपुरोहित की टीम ने गोपनीय सत्यापन की कार्रवाई की, तो इसमें परिवादी खींवसिंह के साथ लाछ कंवर, भंवरसिंह व चंदनसिंह के नाम जॉब कार्ड बनाने की एवज में कागजात जमा कराते समय 500 रुपए लेने और कुल 1800 रुपए मांगने की पुष्टि हुई। गुरुवार को टीम ने ट्रेप प्लान करके बैंगटी खुर्द के ग्राम विकास अधिकारी जसवंतराम को रिश्वत की शेष राशि 1300 रुपए लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
35 सौ की रिश्वत लेते पकड़ा
डीआईजी डॉ. विष्णुकांत के अनुसार इसी तरह एक अन्य कार्रवाई बीकानेर के खाजूवाला में करते हुए एसीबी बीकानेर टीम ने ग्राम पंचायत सियासर चैगान के ग्राम विकास अधिकारी माणकचंद को 3500 रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
वहां एएसपी रजनीश पूनिया के समक्ष सियासर चैगान निवासी परिवादी नजीर खां पुत्र अलाजी ने शिकायत दी थी। इस शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपी माणकचंद द्वारा 1500 रुपए लेने और शेष राशि बाद में लेना तय किया गया। गुरुवार को शेष राशि 3500 रुपए लेने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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