शिवपुरी गांव जहां पिछले 14 दिन से धरना और 5 दिन से आमरण अनशन चल रहा है। मांग एक ही-गांव में कचरा प्लांट नहीं लगने देंगे। इसी के विरोधस्वरूप रविवार को गांव में 450 घरों में चूल्हा नहीं जला। एक साथ पूरे गांव के सामूहिक उपवास की सूचना पर प्रशासन हरकत में आया।
धरना स्थल पर पहुंची एसडीएम प्रियंका बिश्नाेई ने ग्रामीणाें से जल्द कचरा निस्तारण संयत्र अन्य स्थान पर लगाने का आश्वासन दिया।एसडीएम ने ग्रामीणाें काे बताया किआज से ही जगह देखने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। एसडीएम बिश्नोई ने ग्रामीणाें से समझाइश करते हुए आंदोलन वापस लेने काे कहा।
उन्हाेंने कहा किग्रामीणाें की उचित मांग को हर संभव तेजगति से हल करवा का प्रयास किया जाएगा। ग्रामीण पूर्व में अधिकारियों द्वारा की गई वादाखिलाफी और अधिशाषी अधिकारी बृजेश सोनी द्वारा करवाए गए झूठे मुकदमे वापिस लेने की मांग पर अड़े रहे। एसडीएम ने कहा कि जब तक उनका आंदोलन चलेगा तब तक यहीं से कार्य करेंगी।
कचरा स्थल के पास रहने वाले गुरप्रीतसिंह ने कहा कि कचरा डालते रहने पर यह लोग आंदोलन वापस लेंगे तो वह परिवार सहित अनशन शुरू कर देगा। धरनास्थल के पास ही बने कचरा स्थल को एसडीएम प्रियंका बिश्नोई ने देखा और स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है। दूर तक उड़ती हुई प्लास्टिक की थैलियों को कल ही एकत्र करवाने के लिए लेबर लगाने, हर स्थिति में कचरा ढककर लाने के अधिशाषी अधिकारी निर्देश दिए।

तस्वीर गांव के हर घर की है। जहां पर रविवार को चूल्हा नहीं जला
14 वर्ष पूर्व आवंटित की थी भूमि, तब से चल रहा विवाद, ग्रामीणाें ने ईओ व तहसीलदार के खिलाफ राेष जताया
वार्ता के दौरान एसडीएम प्रियंका बिश्नोई ने माना कि कचरा स्थल गांव की समस्या है और इसको हटाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। अधिकारियों ने अपने स्तर पर अलग से वार्ता की और इसके बाद सरपंच मोहनी देवी से वार्ता करनी चाही। सरपंच ने झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वाले अधिशाषी अधिकारी से वार्ता करने से इनकार कर दिया। वार्ता के दौरान आंदोलनकारियों ने अधिशाषी अधिकारी बृजेश सोनी और तहसीलदार अजीतकुमार गोदारा के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया। रविवार को आमरण अनशन पर बैठने वालाें की संख्या बढ़कर चार हो गई।
उल्लेखनीय है कि 14वर्ष पूर्व नगरपालिका काे ठोस कचरा संयंत्र लगाने के लिए कलेक्टर द्वारा शिवपुरी गांव के पास भूमि आंवटित की गई थी। 10 वर्ष पूर्व नगरपालिका द्वारा इस भूमि के चार फुट चारदीवारी करवा दी गई। ग्रामीणाें का आराेप है किउस समय ठेकेदार द्वारा इस स्थान पर बड़ा अस्पताल बनना बताया इस कारण लोगों ने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया।
मंडी की गंदगी, मंडी के पास बने गड्ढाें और अनूपगढ़-सूरतगढ़ मार्ग व करणीजी वितरिका के बीच बने गड्ढाें में ही निस्तारित होती रहती थी। करणीजी वितरिका के पास कचरा डालने के खिलाफ एनजीटी न्यायालय द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। दूसरी तरफ मंडी में अधिकतर गड्ढ़े भरते गए। गंदे पानी के गड्ढे के पास कचरा डालना आरंभ किया ताे वह गड्ढे भी छाेटे हाेते गए।
अब नगरपालिका ने कचरा सयंत्र लगाने के स्थान पर कचरा डालना आरंभ किया, जिससे आबादी के साथ आसपास के खेतों में हर तरफ प्लास्टिक थैलियां नजर आने आने लगी, गांव में वर्षा के दिनों में दुर्गंध फैलने लगी तो शिवपुरी निवासियों को इस स्थल की वास्तविकता का पता चला।
इस कचरा स्थल को हटाने के लिए कई बार ग्रामीणाें द्वारा आंदाेलन किए गए। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणाें से समझाइश कर आंदाेलन समाप्त करवा दिया जाता। 7 मार्च को प्रथम बार लिखित समझौता हुआ, जिसमें नगरपालिका ने तीन माह का समय मांगा।
इस बार 20 जून काे फिर मांग पत्र मिलने पर नगरपालिका या तात्कालीन एसडीएम ने मामले को गंभीरता ने नहीं लिया। 22 जून को आंदोलन आरंभ होने के साथ ही कचरा डालने से नगरपालिका की गाड़ियों को रोक दिया। नगरपालिका ने समझाइश की बजाय पुलिस में शिकायत कर दी।
निस्तारण संयंत्र को अन्यत्र स्थानांतरित के लिए डीएलबी काे भेजा पत्र: एसडीएम
श्रीविजयनगर एसडीएम प्रियंका बिश्नोई ने बताया कि प्लास्टिक और मृत पशुओं को ठोस कचरा निस्तारण स्थल पर डालना गलत है। इन दोनों को तुरंत हटाने और गड्ढा खोदकर शेष कचरा जमीनदोज करने के लिए नगरपालिका को आदेश जारी किए हैं। कचरा स्थल का मैं निरीक्षण करती रहूंगी। ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र को अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए डीएलबी काे पत्र लिखा गया है। डीएलबी से अनुमति मिलने पर उसी दिन अागामी कार्यवाही शुरू करवा दी जाएगी।
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