भाेलेनाथ के प्रिय मास सावन में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में 20 जुलाई सोमवार को मनाई जाएगी। हरियाली एवं पितरों को सम्मिलित रूप से समर्पित इस पर्व पर बुध, गुरु, शुक्र, शनि, देव अपनी स्व राशि पर रहेंगे।
वहीं, सावन का तीसरा सोमवार होने से ये संयोग कई साल बाद बन रहा है। नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, देव पूजा एवं पाैधरोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन ने बताया कि सोमवार को अमावस्या चार ग्रहों के शुभ योग में शिव पार्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने हर तरह की मनोकामना का पूर्ति होती है। जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष, शनि की दशा और पितृ दोष है। उन्हें शिवलिंग पर पंचामृत अवश्य चढ़ाना चाहिए।
भास्कर पहल: इस बार हरियाली अमावस्या पर एक पौधा जरूर लगाएं
सावन का महीना प्रकृति में हरियाली और उत्साह का महीना माना जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशियों का जश्न है। पृथ्वी की संपन्नता उसके वनों से जिससे प्रकृति में संतुलन बना रहता है। इसलिए, हरियाली अमावस्या के दिन एक पाैधा सभी को लगाना चाहिए। इस दिन पाैधरोपण से ग्रह दोष शांत होते हैं। अमावस्या तिथि का संबंध पितरों से भी माना जाता है।
पितरों में प्रधान अर्यमा को माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि वह स्वयं पितरों में प्रधान अर्यमा हैं। हरियाली अमावस्या के दिन पाैधरोपण से पितर भी तृप्त होते हैं, यानी इस दिन पाैधे लगाने से प्रकृति और पुरुष दोनों ही संतुष्ट होकर मनुष्य को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए इस दिन एक पौधा लगाना शुभ माना जाता है।
एक पाैधा लगाना सैकड़ों यज्ञ के बराबर
शास्त्रों में इस दिन पाैधरोपण का विधान बताया है। भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जिसको संतान नहीं है, उसके लिए वृक्ष ही संतान है। वृक्ष लगाने से मनोकामना पूर्ण होती हैं। दिन-रात ऑक्सीजन देने वाले पीपल में ब्रह्मा, विष्णु व शिव का वास होता है। पद्म पुराण में कहा गया है कि एक पीपल का पाैधा लगाने से मनुष्य को सैंकड़ों यज्ञ के बाराबर पुण्य मिलता है। पीपल के दर्शन से पापों का नाश, स्पर्श से लक्ष्मी की प्राप्ति एवं उसकी प्रदक्षिणा करने से आयु बढ़ती है।
वृक्षों में बसते हैं देवता
हरियाली अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा करते हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों में पर्वत और पेड़-पौधों में भी ईश्वर का वास बताया गया है। पीपल में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु व शिव और आंवले के वृक्ष में भगवान लक्ष्मीनारायण का वास माना जाता हैं। पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए ही हरियाली अमावस्या के दिन पाैधरोपण करने की प्रथा है।
सुख-समृद्धि के द्वार हैं पाैधे
पेड़-पौधे हमारी सुख-समृद्धि का द्वार हैं। प्रकृति द्वारा पंच महाभूत जिस प्रकार हमारे लिए उपयोगी हैं, उसी प्रकार पर्यावरण संजोने के लिए पेड़ जरूरी हैं। राशि नक्षत्र ग्रहों के अनुसार पाैधे लगाने से हमारी सेहत, धन, स्वभाव, आत्मविश्वास बढ़ता है। अपनी राशि व कुंडली के खराब ग्रह के अनुसार पौधा रोपें। इससे कुंडली में स्थित खराब ग्रह अगर बाधा बन रहा है, तो वह बाधा भी दूर हो जाएगी।
ग्रहों का पौधों से संबंध
27 नक्षत्रों का संबंध प्रत्येक वृक्ष से है। 9 ग्रहों का संबंध भी पौधों से है। 1 राशि में 3 नक्षत्र, 9 चरण होते हैं, प्रत्येक नक्षत्रोंं को 4 चरण में विभाजित किया है, यदि राशि स्वामी या नक्षत्र स्वामी के अनुसार वृक्ष लगाएं तो सर्वांगीण विकास होगा।
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