(प्रमोद कल्याण) कोरोना वायरस ने लोगों खासकर बुजुर्गों में खौफ पैदा कर दिया है। इसलिए भरतपुर में पिछले एक माह के दौरान वसीयत बनवाने के मामलों में अप्रत्याशित तेजी आई है। पिछले साल के मुकाबले जून,2020 के दौरान 231 प्रतिशत वसीयत अधिक रजिस्टर्ड हुई हैं।

मसलन, पिछले साल का मासिक औसत 16 है, जबकि अनलॉक होते ही जून में 37 मामले पंजीकृत हुए। यह तो पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़े है। नोटरी से प्रमाणित मामलों की संख्या इससे भी ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि भरतपुर जिले में कोरोना संक्रमित करीब 47 लोग जान गंवा चुके हैं। इनमें बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है।

दिलचस्प बात ये है कि आम तौर पर अमीर लोग ही अपने उत्तराधिकारियों में संपत्ति का बंटवारा करने के लिए वसीयत बनवाते थे। लेकिन, अब मध्यम वर्गीय लोग भी वसीयतें बनवा रहे हैं। इनमें अनेक लोग स्वस्थ और कम उम्र के भी हैं। रियल एस्टेट एवं पंजीयन पेशे से जुड़े एडवोकेट पंकज सिंघल कहते हैं कि हाल के महीनों में वसीयत कराने के मामले बढ़े हैं।

मुझे लगता है कि इसकी प्रमुख वजह कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों के मन में चिंताएं हैं। वसीयत कराने वालों की बातचीत से भी ऐसा सामने आया है। इसलिए अब सीनियर सिटीजन ही नहीं 50 प्लस के लोग भी वसीयत बनवा रहे हैं। जायदाद को लेकर होने वाले विवाद से बचने लिए अनेक व्यक्तियों ने 100 और 500 रुपए के स्टांप पर भी वसीयत लिखकर नोटरी पब्लिक से पंजीकृत कराई है।

वैसे कानूनी दृष्टि से पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में पंजीकृत कराना आवश्यक है। लेकिन, फीस और समय बचाने के लिए बहुत से लोग नोटरी से ही वसीयत सत्यापित करवा रहे हैं। ताकि बाद में घर, दुकान, प्लॉट एवं अन्य संपत्ति के बंटवारे को लेकर बच्चों में कलह नहीं हो।

हर रोज हो रही औसतन 2-3 वसीयत

2019 में मार्च से जून तक 66 वसीयत पंजीकृत हुई थीं। इस साल अनलॉक होते ही जून में 37 वसीयत पंजीकृत हो चुकी हैं। औसत से यह 231 प्रतिशत अधिक हैं। एडवोकेट दीपक सिंघल बताते है कि अगर आंकड़ों देखें तो हर माह औसतन 16 वसीयत पंजीकृत होती हैं, लेकिन कोरोना काल में दो गुने से ज्यादा इजाफा हुआ है। जुलाई में भी रोजाना दो-तीन मामले आ रहे हैं।

नोटरी पब्लिक एडवोकेट चंद्रकिशोर भारद्वाज बताते हैं कि नया बदलाव यह है कि पहले केवल वे ही व्यक्ति वसीयत की नोटरी के लिए आते थे जो लंबे समय से बीमार होते थे अथवा 70 प्लस हो गए। लेकिन, अब 50 प्लस के अधेड़ भी वसीयत करवा रहे हैं। कई बुजुर्गों ने कहा भी कि कोरोना संक्रमण में जीवन का कोई भरोसा नहीं है टाइटल क्लियर रहने चाहिए, जिससे बच्चों में विवाद नहीं हो।

लॉकडाउन ने तय किया वसीयत बनवाना : अशाेक

बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और कई सामाजिक संस्थाओं से जुडे़ एडवोकेट अशोक कुमार कहते हैं कि बहुत से परिवारों में जो सदस्य पहले अलग-अलग और बाहर रहते थे वे लॉकडाउन में एक साथ रहे। इस दौरान भविष्य को लेकर चर्चाएं भी हुईं। ऐसे में संपत्तियों का भी निर्धारण हुआ। इसलिए बुजुर्गों की सहमति से वसीयत बनीं और पंजीकृत हो रही हैं।

फैमिली सेटलमेंट के मामले बढ़े : मित्तल

अनलॉक के बाद फैमिली सेटलमेंट के मामले बढ़े हैं। कारण कई होते हैं। जिनमें एक कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता भी हो सकती है। लोग बाद की स्थितियों को विवाद रहित रखना चाहते हैं। इसलिए वसीयत पंजीकृत करवाते हैं।

- अशोक मित्तल, उप पंजीयक, एवं तहसीलदार



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