नए अस्पताल में बुधवार सुबह एक बार फिर काेराेना मरीजाें ने हंगामा कर दिया। संक्रमित मरीजाें के वार्ड में करीब 50 मरीज थे और एक ही टाॅयलेट था। ऐसे में सुबह से ही टाॅयलेट के बाहर लंबी कतार लग गई। इसकाे लेकर मरीजाें ने हंगामा कर दिया, मामला प्रबंधन तक पहुंचा ताे दूसरे टाॅयलेट्स खाेले गए और महिलाओं काे अलग वार्ड में भेजा गया।
मंगलवार काे एसएसबी से मरीजाें काे नए अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, लेकिन शिफ्टिंग के दाैरान 50 संक्रमित महिला-पुरुष मरीजाें काे एक ही वार्ड में रख दिया। रात काे ताे मरीज आकर साे गए, लेकिन बुधवार सुबह जैसे ही उठे ताे पता चला कि वहां एक ही शाैचालय व बाथरूम है। ऐसे में सुबह से ही शाैचालय के बाहर मरीजाें की कतारें लग गई। महिलाओं के लिए भी अलग से व्यवस्था नहीं थी ताे वे भी खासी परेशान हाेती रही।

एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने की नाैबत आ गई। वार्ड में भर्ती मरीज ने बताया कि रात काे हमें पता नहीं था कि सुबह यह दिक्कत आने वाली है। हम सभी काे यूराेलाॅजी वाले वार्ड में रखा गया था। लेकिन सुबह यह दिक्कत आते ही हमने अस्पताल प्रबंधन के सभी अधिकारियाें काे काॅल किए। इसलिए हमने विराेध के ताैर पर खाना-पीना भी बंद कर दिया, फिर जैसे ही यह बात अधिकारियाें तक पहुंची ताे दूसरे टाॅयलेट्स खाेले गए और महिलाओं काे दूसरे वार्ड में भेजा। बेड के बीच पर्याप्त दूरी भी नहीं थी। ऐसे में निगेटिव मरीजाें के फिर से पाॅजिटिव हाेने का खतरा था।

जिस वार्ड में कोरोना संक्रमित मरीज रखे थे, उसमें दो टॉयलेट हैं, लेकिन एक खराब था। सुबह मरीजों को दो वार्डों में शिफ्ट कर दिया। साइकिल स्टैंड संचालक का बिना मास्क पहने पॉजिटिव वार्ड में जाना गलत है, उसका कोविड टेस्ट कराएंगे।
- डॉ. सीएस सुशील, अधीक्षक, नया अस्पताल

लापरवाही : आइसोलेशन वार्ड में बिना मास्क चला गया स्टैंड संचालक
मरीजाें ने बताया कि यहां पानी व अन्य व्यवस्थाओं का काम अस्पताल का साइकिल स्टैंड संचालक संदीप दिवाकर देख रहा है। सुबह जैसे ही यह बात अधिकारियाें काे पता लगी ताे वह पुलिस के साथ वार्ड में आया। हम उसे देखकर हैरान रह गए, क्याेंकि उसने मास्क भी नहीं लगा रखा था। पाॅजिटिव मरीजाें के वार्ड में, जहां स्टाफ पीपीई किट पहनकर आता है, वहां बिना मास्क आना कितना खतरनाक हाे सकता है।

इसे लेकर भी मरीजाें ने आपत्ति जताई। मरीजाें का कहना था कि हमें खाना व पानी की सप्लाई का काम उक्त व्यक्ति ही देखता है। इस तरह यह व्यक्ति बिना मास्क हमारे वार्ड में आ गया, ऐसे में उसके संक्रमित हाेने के पूरी संभावना है। और यदि वह संक्रमित हुआ ताे न जाने कितने लाेगाें काे संक्रमित करेगा। ताज्जुब इस बात का था कि वह पुलिस के साथ वहां आया, पुलिसकर्मी ने मास्क पहना था, लेकिन बिना मास्क हाेने के बावजूद उसे टाेका तक नहीं।

मरीजाें ने हंगामा किया ताे उसने बाहर जाकर मास्क पहन लिया। इस मामले में भास्कर से बातचीत में दिवाकर ने कहा कि मैं पानी की सप्लाई का काम कर रहा हूं, बाकी मरीज के परिजन खाना दे जाएं ताे पहुंचा देता हूं। सुबह हमें किसी ने बताया कि मरीजाें ने खाना-पानी बंद कर दिया ताे मैं वार्ड में गया था, यह बात सही है कि मैं पहले बिना मास्क लगाए चला गया था, लेकिन बाद में मैंने मास्क लगा लिया था।

उमस के बीच 8 घंटे ड्यूटी से हैल्थ वर्कर्स भी बेहाल
इस पूरे अस्पताल में आप कितने ही कूलर लगा लो, लेकिन यहां जो सफोकेशन है, उससे दम घुटता है। कूलर तो और ज्यादा उमस पैदा करते हैं। अब या तो पीपीई किट पहनकर गर्मी से वैसे ही बेहोश हो जाएं या फिर बिना पीपीई किट पहने संक्रमित हो जाएं। कुल मिलाकर हम दोनों तरह से संकट में हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। कुछ इसी तरह से नए अस्पताल में शिफ्ट किए गए कोविड वार्ड में ड्यूटी करने वाली एक महिला नर्सिंगकर्मी ने अपनी व्यथा बयां की।

उन्होंने बताया कि कहना बहुत आसान है, लेकिन कोई आए और यहां 8 घंटे पीपीई किट पहनकर बता दे, मैं दावे के साथ कहती हूं कि उनकी तबीयत बिगड़ जाएगी। डॉक्टर्स या अन्य लोग तो राउंड लेकर चले जाते हैं, उन्हें पूरे समय पीपीई किट पहनकर नहीं रहना होता, लेकिन यहां काम करने वाले नर्सिंग कर्मचारियों को पूरे 8 घंटे बैठना पड़ता हैै। मैंने यहां शिफ्ट करने के बाद से पीपीई किट पहनना बंद कर दिया, क्योंकि नहीं पहन सकते। हां, अच्छे से डबल मास्क लगाकर रखती हूं। लेकिन इससे संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।

मरीजों की निगरानी भी चुनौती
ड्यूटी कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि यहां एक काम और बढ़ गया, वह है मरीजों की निगरानी रखना। सुपर स्पेशियलिटी विंग तो पूरी तरह पैक थी, इसलिए वहां मरीजों के बाहर जाने का डर नहीं था। यहां मरीज कहीं से भी बाहर निकल सकते हैं। ऐसे में मरीजों पर पूरी नजर रखनी पड़ती है।

बीती रात को ही कई मरीज इधर-उधर घूमते रहे, जिन्हें बार-बार समझाइश करके वार्ड में लाना पड़ा। असल में यहां ज्यादातर मरीज एसिम्प्टोमेटिक है, जिन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है। ऐसे में वे पूरे समय चाहकर भी बेड पर लेटे नहीं रह सकते।



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50 patients shifted in one ward, long queues outside the only toilet
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