कोटा में कोरोना के 105 दिन के इतिहास में शनिवार को 2 नए अनचाहे रिकॉर्ड बने। महज एक ही दिन में 54 नए केस रिपोर्ट हुए, जो अब तक का एक दिन का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक एक ऐसा केस सामने आया, जिसने डॉक्टरों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया। नए अस्पताल की एक महिला नर्सिंग कर्मचारी महज 3 माह के अंतराल में दूसरी बार कोरोना संक्रमित हो गई।
अब तक यह माना जा रहा था कि जिसे एक बार कोरोना संक्रमण हो चुका, उसे दोबारा होने की संभावना नगण्य है, लेकिन इस केस ने उक्त थ्योरी को खारिज कर दिया। फिलहाल इस पूरे केस पर कोटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर स्टडी कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि नर्सिंग कर्मी की एंटी बॉडी व रिपीट टेस्ट कराने की तैयारी है।
भीमगंडमंडी एरिया निवासी एक और वकील पॉजिटिव मिला है। शुक्रवार को एक बाबू व 3 वकील संक्रमित मिले थे। एरोड्रम स्थित एक फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में 4 कर्मचारी पॉजिटिव पाए गए हैं। यहां गत दिनों एक कार्मिक पॉजिटिव मिला था। टिपटा डिस्पेंसरी में शुक्रवार को 70 सैंपल लिए गए थे, इनमें से 13 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं।
आरएसी की द्वितीय बटालियन के 6 कार्मिक व ग्रामीण पुलिस लाइन का हैड कांस्टेबल पॉजिटिव मिला है। सुभाष नगर अनंतपुरा का फल विक्रेता, नयापुरा इस्माइल चौक और रामचंद्रपुरा से 1-1 वृद्ध पॉजिटिव। जेकेलोन अस्पताल में शनिवार को दो प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव आई हैं। एमबीएस में जेल से लाया गया कैदी जांच में पॉजिटिव मिला है।
बिना पीपीई किट कोरोना पेशेंट लेने पहुंचा एंबुलेंस ड्राइवर
कोरोना के खतरे के बीच लापरवाही की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। शनिवार को सरकारी एंबुलेंस के साथ मेडिकल टीम कैथूनीपोल एरिया से कोरोना मरीजों को लेने पहुंची। इस दौरान ड्राइवर ने केवल मास्क पहन रखा था। इस दौरान टीम ने भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट को फोटो खींचते देखा तो कैथूनीपोल थाने के सामने ड्राइवर के लिए पीपीई किट मंगवाई। ड्राइवर ने बीच सड़क पर ही किट पहनी।
एनालिसिस : कम्युनिटी ट्रांसमिशन की ओर बढ़ रहा कोटा
कोटा तेजी से कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन की ओर बढ़ रहा है। अभी इस बीमारी का दूसरे चरण है। रोजाना शहर में नए हॉटस्पॉट बन रहे हैं और अब सुपर स्प्रेडर भी मिल रहे हैं। बीते एक सप्ताह में 213 नए मरीज मिल चुके हैं। कम्युनिटी ट्रांसमिशन कब माना जाता है? इसे लेकर भास्कर ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विजय सरदाना से बात की-
- कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना या वायरस से संक्रमित देश की यात्रा किए बिना ही इसका शिकार हो जाता है।
- सीधे शब्दों में कहें तो कम्युनिटी ट्रांसमिशन उस स्थिति का नाम है, जब मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग होना बंद हो जाए। यानी यह पता लगना बंद हो जए कि मरीज कहां से इंफेक्टेड हुआ?
- हमारे पीएसएम विभाग ने मुझे लिखित में दिया है कि कोटा अभी लेवल टू पर है। यानी दूसरी स्टेज पर है। तीसरी स्टेज को कम्युनिटी ट्रांसमिशन माना जाता है। इसलिए अभी हम कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्टेज पर नहीं है।
कोरोना के 4 लेवल इस तरह होते हैं
पहला चरण : इसमें वे लोग संक्रमित होते हैं, जो दूसरे देश से लौटे हों। यह स्टेज हम काफी पार कर चुके हैं। क्योंकि स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैल चुका है।
दूसरा चरण : इसमें स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है। हमारे यहां वर्तमान में यही स्थिति है।
तीसरा चरण : कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता हैै।
चौथा चरण : जब संक्रमण महामारी का रूप ले लेता है।
कम्युनिटी ट्रांसमिशन यानी जब वायरस सोसाइटी के हर स्तर पर पहुंच जाता है। इसके कारण वे लोग भी प्रभावित होते हैं, जिन्होंने इस अवधि में न तो यात्रा की है और न ही किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, जो कोरोना से संक्रमित हुआ है। अभी हमारे यहां यह स्थिति नहीं है। - डॉ. एमपी सिंह, डिप्टी डायरेक्टर कोटा जोन, प्रिवेंटिव व कम्युनिटी मेडिसिन के एक्सपर्ट
रेजीडेंट डाॅक्टर सहित 6 हैल्थ वर्कर संक्रमित
नए अस्पताल की रेजीडेंट सहित 4 हैल्थ वर्कर संक्रमित मिले हैं। निजी अस्पताल के 2 हैल्थ वर्कर भी पॉजिटिव मिले हैं। नए अस्पताल की महिला नर्सिंगकर्मी 86 दिन में दूसरी बार संक्रमित मिली हैं। पहले उन्हें 22 अप्रैल को संक्रमण हुआ था। ठीक होने के बाद वे दोबारा ड्यूटी कर रही थीं। सुभाष नगर निवासी 44 साल की इस महिला कर्मचारी को डायबिटीज व हाइपरटेंशन की समस्या है। 12 जुलाई से वे क्वारेंटाइन पीरियड में थीं, इसी दौरान वे पॉजिटिव मिलीं। राज्य और देश में ऐसे कुछ मामले पहले भी मिल चुके हैं।
नाॅलेज : बिना लक्षण वाले मरीजों में नहीं होती एंटीबाॅडी, इसलिए दोबारा इंफेक्शन का खतरा
भास्कर ने नर्सिंग कर्मी के दोबारा संक्रमण को लेकर एम्स, जोधपुर में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. विजय लक्ष्मी नाग से बात की, जो इसपर रिसर्च कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भ्रम है कि कोरोना संक्रमण किसी मरीज को दोबारा नहीं हो सकता। ऐसा किसी एक्सपर्ट ने नहीं कहा और न ही दुनियाभर में अब तक उपलब्ध लिटरेचर में ऐसी पुख्ता बात लिखी है। हमारे जोधपुर एम्स में मेरी लैब में ही ऐसे कुछ मामले आ चुके हैं, अन्य जगह भी आए हैं, हम इस पर एक रिसर्च पेपर भी तैयार कर रहे हैं।
- हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि कोविड में जितने भी एसिम्प्टोमेटिक मरीज हैं, उनमें प्रोटेक्टिव एंटी बाॅडी डवलप नहीं हो पाती, इसलिए उन्हें री इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है।
- कुछ संभावनाएं फॉल्स रिपोर्टिंग की भी होती हैं, पहले या बाद वाले टेस्ट में कोई ऐसा कारण रहा हो। उक्त केस में रिपीट टेस्ट कराया जाना चाहिए।
- एक और संभावना यह भी होती है कि आरटी पीसीआर टेस्ट डेड या अलाइव वायरस को डिटेक्ट नहीं कर पाता। संभव है कि नेजोफेरेंज में कोई डेड वॉयरस पड़ा है, जो आरटी पीसीआर मेथड में डिटेक्ट हो गया हो और रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही हो।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें