(प्रहलाद तिवारी)शहरी विकास से जुड़े दाे निकायाें में नीलामी में बिकने वाले भूखंड व मकान की हिस्सा राशि लेन-देन काे लेकर विवाद है। नगर परिषद सभापति मंजू चेचाणी ने यूआईटी सचिव काे पत्र लिखकर वर्ष 2012-13 से पेंडिंग करीब 63 कराेड़ रुपए की हिस्सा राशि मांगी है। इधर, यूआईटी का तर्क है कि शहर में विकास के कई ऐसे कार्य ट्रस्ट ने करवाए जो परिषद को करवाने थे। कई ऐसे काम भी हैं जिनमें नगर परिषद काे भी यूआईटी के बराबर हिस्सा राशि देनी थी लेकिन नहीं दी। इसलिए राशि समायोजित कर राशि देने को तैयार है।
नगर परिषद हर साल यूआईटी काे पत्र लिखती है। साल में दाे-चार बार दाेनाें निकायाें के अधिकारियाें की मीटिंग भी हाेती हैं लेकिन ये मीटिंग बेनतीजा रहती हैं। अब सभापति चेचाणी नेयूआईटी सचिव काे पत्र लिखा। दाेनाें विभाग के अधिकारियाें की मीटिंग भी हाे चुकी हैं।

उनका तर्क है कि यूआईटी की ओर से राशि नहीं देने के कारण नगर परिषद के कई काम अटके हुए हैं। राशि नहीं देने पर कलेक्टर एवं यूआईटी प्रशासक से हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे लेकिन हिस्सा राशि लेकर रहेंगे।

नगर परिषद का तर्क: हर तिमाही में पैसा देना है लेकिन 7 साल से बकाया चल रहा
नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग के तत्कालीन संयुक्त शासन सचिव ने आदेश जारी प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों को निर्देश दिए थे कि वे भूखंड व मकान आबंटन व नीलामी से प्राप्त होने वाली आय का 15 प्रतिशत हिस्सा राशि संबंधित नगर परिषद या नगर पालिका को प्रत्येक तिमाही में हस्तांतरित करेंगे।

इसके बावजूद सात साल से यूआईटी ने काे पैसा हस्तांतरित नहीं किया। यूआईटी ने वर्ष 2012-13 तक की बकाया राशि 3.31 करोड़ में से 2.50 करोड़ का भुगतान नगर परिषद को किया था। लेकिन इसके बाद से हिस्सा राशि का भुगतान नहीं किया।

यूआईटी का तर्क: परिषद को प्रगति पथ व ओवरब्रिज बनाने थे लेकिन नहीं बनाए
यूआईटी अधिकारियों का कहना है कि शहर सौंदर्यीकरण समिति की मीटिंग में हुए निर्णय के अनुसार नगर परिषद व यूआईटी शहर में दो-दो गौरव पथ बनाने थे। अजमेर रोड एवं चितौडग़ढ़ रोड के दो गौरव पथ यूआईटी ने बनाए। इसके बाद उदयपुर व कोटा रोड के गौरव पथ परिषद को बनाने थे लेकिन परिषद के नहीं बनाने पर यूआईटी ने बनाए।

इसी प्रकार रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में भी दोनों निकायाें को 50-50 प्रतिशत राशि मिलानी थी। लेकिन नगर परिषद ने एक भी रुपया नहीं दिया। इस राशि का समायाेजन हाेने के बाद बकाया राशि दी जा सकती है।

दाेनाें निकायाें के अधिकारियाें की मीटिंग में नहीं निकला नतीजा
नप का पत्र मिलने के बाद यूआईटी के एसई रामेश्वर लाल शर्मा, सहायक लेखाधिकारी अनिल शर्मा व राजेश कुमार और नगर परिषद सभापति मंजू चेचाणी की संयुक्त मीटिंग हुई। इसमें परिषद की लेखा शाखा के अधिकारी मौजूद रहे लेकिन समायोजन राशि को लेकर सहमति नहीं बनने से मामला वहीं अटक गया। अब सभापति इस मामले काे लेकर कलेक्टर के पास जाएगी ताकि जल्दी हिस्सा राशि का भुगतान हाे।

नगर परिषद 63 करोड़ रुपए यूआईटी में मांगती है। इसके लिए यूआईटी को पत्र लिखा। यूआईटी से अधिकारियों की कमेटी भी आई। उसमें हुई चर्चा के अनुसार हमने यूआईटी से पूरी राशि की डिमांड की है। हम यह राशि लेकर रहेंगे।-मंजू चेचाणी, सभापति

यूआईटी ने नगर परिषद एरिया में भी पार्षदाें के कहने पर काम करवाए हैं। कई ऐसे प्राेजेक्ट थे जिनमें नगर परिषद काे भी हिस्सा राशि देनी थी जो नहीं दी। परिषद राशि का समायोजन करने पर सहमत हो तो शेष राशि यूआईटी देने का तैयार है। -रामेश्वर शर्मा, एसई, यूआईटी

आदेश-15 अप्रैल 2010 को उल्लेख 15% हिस्सा देने का
नगरीय विकास विभाग ने 15 अप्रैल 2010 को आदेश जारी किया था। इसके अनुसार यूआईटी को भूखंड व भवन की बिक्री से हाेने वाली राशि का 15% हिस्सा नप को देना हाेगा। इसके बदले परिषद यूआईटी की काॅलाेनियाें में सफाई सहित अन्य रखरखाव का काम करवाएगी। परिषद काे यह राशि शहर के विकास कार्याें पर खर्च करनी हाेती है।

कार्य अटके-सफाई, पार्काें, स्ट्रीट लाइट व साैंदर्यीकरण के 50 काम
विभाग के अनुसार यूआईटी से मिलने वाली 15% हिस्सा राशि का उपयाेग सफाई, राेड लाइट मेंटेनेंस व पार्काें के रखरखाव व साैंदर्यीकरण पर खर्च कर सकते हैं। सभापति का कहना है कि यूअाईटी से राशि मिलने पर सभी कार्य करने हैं लेकिन अभी ये पेंडिंग हैं। पार्काें और राेड लाइटाें के काम पाइपलाइन में हैं लेकिन बजट नहीं हाेने के अभाव में करीब 50 काम पेंडिंग हैं। यूआईटी से पैसा मिलने पर ये काम करवाने हैं।



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