राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित 12वीं साइंस का रिजल्ट बुधवार को शाम 4 बजे जारी किया गया। बाड़मेर में साइंस का रिजल्ट 92.82 प्रतिशत रहा। गत साल के मुकाबले परीक्षा परिणाम 1.8 फीसदी बढ़ा है। होनहारों की मेहनत के बूते बाड़मेर प्रदेश में 9वें पायदान पर पहुंचा है। जबकि गत साल जिला 22वें स्थान पर था। आदर्श विद्या मंदिर सीनियर सैकंडरी स्क्ूल बाड़मेर के छात्र अभिषेक जोशी 98 फीसदी अंकों के साथ जिले का टॉपर रहा। साइंस के नतीजों में इस बार भी बेटों के मुकाबले बेटियां अव्वल रही है। बेटियों का रिजल्ट 97.08 और बेटों का 91.40 फीसदी रहा। इस बार निजी ही नहीं सरकारी स्क्ूलों का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा है। पहली बार जिले के सरकारी स्कूलों का साइंस का परिणाम निजी स्कूलों के मुकाबले में अच्छा रहा है। जबकि हर साल निजी स्कूल ही अव्वल रहते थे।
विज्ञान में श्रेणीवार विद्यार्थी -प्रथम: 3621, द्वितीय:649, तृतीय: 2
बाड़मेर की बेटियां बेमिसाल: साइंस नतीजों में प्रदेश में तीसरे स्थान पर
12वीं बोर्ड के साइंस नतीजों का विश्लेषण बताता है कि बेटों के मुकाबले बेटियां दो कदम आगे है। जिले में बेटियों का परीक्षा परिणाम 97.08 प्रतिशत रहा है। पहली बार नतीजों के लिहाज से बाड़मेर की बेटियां प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही। यानी दो जिलों की बेटियां ही पूरे राजस्थान में हमारे से आगे है। 31 जिलों को पीछे छोड़ दिया। साइंस में 2016 में छात्रों का परिणाम 89.67 और छात्राओं का 95.97 फीसदी रहा। 2017 में छात्रों का 91.72 व छात्राओं का 92.44 प्रतिशत, 2018 में छात्रों का 83.32 व छात्राओं का 87.32 प्रतिशत रहा। गत साल छात्रों का 89.99 और छात्राओं का 94.37 फीसदी रहा।
60 फीसदी सरकारी स्कूलों का परिणाम 100 फीसदी
हर साल साइंस के नतीजों में सरकारी स्कूल पीछे रहते हैं। निजी स्कूलों का ही अब तक दबदबा रहा है। पहली बार जिले के 60 फीसदी सरकारी स्कूलों का साइंस का परीक्षा परिणाम 100 फीसदी रहा है। सीनियर सैकंडरी स्कूल चौहटन, हरसाणी, राणासर कला समेत कई स्कूलों के सभी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए है। शेष 40 फीसदी स्कूलों के नतीजे भी 80 फीसदी से अधिक रहे हैं। यानी गिने-चुने स्कूल को छोड़ दे तो एक भी स्कूल का कमजोर प्रदर्शन नहीं रहा है।

क्या कहते हैं जिले के टॉपरसत्र शुरू होते ही विद्यार्थी स्कूल में पढ़ाए गए विषयों का रिवीजन करें: अभिषेक
सत्र शुरू होते ही पढ़ाई शुरू कर दी। नियमित पांच से सात घंटे पढ़ने लगा। सेल्फ स्टडी के साथ शिक्षकों का मार्गदर्शन भी लिया। दसवीं बोर्ड से ज्यादा अंक लाने का लक्ष्य तय करने के साथ मेहनत जारी रखी। स्कूल से घर आते ही रोजाना रिविजन करता था। लॉकडाउन की वजह से मैथ्स में 100 में से 100 नंबर आए। विद्यार्थी सत्र शुरू होते ही स्कूल में पढ़ाए गए विषयों का घर पर रिविजन करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी। वह इंजीनियरिंग फिल्ड में जाना चाहता है।
(जैसा जिले के टॉपर अभिषेक जोशी ने बताया।)
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