दिमाग में जमे खून के बड़े थक्के से आए लकवे को डॉक्टर्स ने न केवल पूरी तरह से ठीक किया बल्कि क्लॉट को भी बिल्कुल हटा दिया। संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल में हुए इस केस में डॉक्टर्स ने दावा किया है कि प्रदेश में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. विपिन खंडेलवाल ने बताया कि रामप्यारी (38) बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंची और उसे लगातार दौरे व बाएं हिस्से में कमजोरी की शिकायत भी थी। उसके दिमाग के सघन हिस्से में एक बड़ा खून का थक्का जमा हुआ था।

ऐसे में हमने एंडोवस्कुलरली साइनस थ्रोम्बेक्टोमी से क्लॉट को हटाने का निर्णय लिया। 12 घंटे में मरीज की हालत में सुधार आने लगा और वह होश में आ गई। डॉक्टर्स ने करीब 18 घंटे तक ब्रेन के साइनस में टीपीए (टिश्यू प्लाज्मिनोजेन एक्टिवेटर) डाला। ऑपरेशन में डॉ. डीपी शर्मा, डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. अशोक, डॉ. मंगल व डॉ. नूपुर द्रविड़ का विशेष सहयोग रहा।



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