शहर में गुरुवार को पहली बार कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थैरेपी शुरू कर दी गई। कोविड वार्ड में एडमिट एक 60 वर्षीय मरीज को पहली बार प्लाज्मा दिया गया। एक घंटे का यह प्रोसेस सफलतापूर्वक पूरा हो गया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विजय सरदाना बताया कि गुरुवार को प्लाज्मा थैरेपी के साथ इलाज शुरू किया गया। रोगी बी पॉजिटिव रक्त समूह का था, जिसका प्लाज्मा हमारे पास उपलब्ध था।

इस ग्रुप के दो कोविड रिकवर व्यक्ति अपना प्लाज्मा डोनेट कर चुके थे। इस थैरेपी को सफलतापूर्वक पूरी करने वाली डॉक्टरों की टीम में डॉ. मनोज सालूजा, डॉ. पंकज जैन, रेजीडेंट डॉ. गौरव भार्गव, डॉ. संदीप व डॉ. विश्वेन्द्र शामिल रहे।
टीम में शामिल रहे डाॅ. पंकज जैन ने भास्कर को बताया कि आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी माॅडरेट कंडीशन वाले पेशेंट को प्लाज्मा थैरेपी दी जा सकती है। यानी मरीज सामान्य भी नहीं हो और बहुत ज्यादा सीरियस भी नहीं हो। इस मरीज की स्थिति माॅडरेट थी तो हमने बीते दो दिन में इसकी जरूरी जांचें कर ली।

इसके बाद ब्लड ग्रुप कराया तो बी पॉजिटिव निकला, जिसका प्लाज्मा हमारे यहां उपलब्ध था। क्रॉस मैचिंग के बाद बिना किसी साइड इफेक्ट के प्लाज्मा चढ़ा दिया गया। प्रिंसिपल डाॅ. सरदाना ने बताया कि कोरोना संक्रमितों के उपचार में प्लाज्मा उपचार पद्धति की उपयोगिता को देखते हुए मेडिकल काॅलेज कोटा ने अप्रैल में आईसीएमआर से कोटा में भी इस पद्धति से उपचार की अनुमति मांगी थी।

काफी दिन तक यह विषय आईसीएमआर में ही लंबित चल रहा था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयास के बाद आईसीएमआर से इसकी स्वीकृति मिली।



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Corona patient started treatment with plasma therapy for the first time in Kota
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