कोई मजदूर भूखा ना सोए के संकल्प के साथ शुरु की गई राज्य सरकार की इंदिरा रसोई में दूसरे दिन कम ही लोग खाना खाना पहुंचे। जो पहुंचे उनमें भी ज्यादातर को भूखे ही लौटना पड़ा। दरअसल रसोई में दोपहर एक बजे के बाद कूपन नहीं कटते। ऐसे में मजदूरी से छूटकर आने वालों को खाना नसीब नहीं हुआ।
वहीं, थानागाजी की रसोई में खाना खाने वाले ज्यादातर लोग नपा कर्मचारी रहे।
दोपहर एक बजे बाद टोकन नहीं कटने से इंदिरा रसोई से काफी मजदूर भूखे लौट गए। रसोई एक बजे बंद हो जाती है। ऑन लाइन टोकन भी नही कट पाता है। दोपहर करीब सवा बजे रसोई के बाहर मायूस खड़े मजदूरों ने बताया कि वे यह सोचकर गांव से खाना नहीं लाए कि इंदिरा रसोई में खा लेंगे। सीधे मकान निर्माण कार्य स्थल पर चले गए। खाने की छुट्टी हुई और यहां आए तब तक सवा बज गया। यहां पता चला की खाना अब शाम 5 बजे मिलेगा।
कस्बों में निर्माण या अन्य कार्य के लिए दहाड़ी मजदूरों का लंच टाइम दोपहर एक बजे से दो बजे तक होता है। एक बजे से पहले कैसे आते। हालांकि बाद में वहां मौजूद तीन मजदूरों को संचालक ने खाना बनवाकर खिलाया।
पहले फाेटाे खींची, फिर खाने की थाली
शहर की तीनाें इंदिरा रसाेई में दूसरे दिन शुक्रवार काे पहली पारी में 371 लाेगाें ने खाना खाया। सबसे अधिक 156 लाेगाें ने केडलगंज की रसाेई में भाेजन किया। खाना देने से पहले तीनाें जगह कूपन काउंटराें पर उन लाेगाें की वेब कैमरे से फाेटाे खींची गई, जाे भाेजन करने आए। इसके बाद 8 रुपए लेकर उन्हें खाने का कूपन दिया गया।
रसाेई शुरू हाेने के दूसरे दिन कहीं भी मिठाई नहीं पराेसी गई। संचालकाें ने बताया कि मिठाई थाली के मीनू में शामिल नहीं है। गुरुवार काे रसाेई का उद्घाटन हाेने के कारण कलाकंद या लड्डू पराेसे थे। केडलगंज की इंदिरा रसाेई में सुबह के खाने में लाेगाें काे राजमा की सब्जी, दाल, अचार व चपाती दी गई।
प्रत्येक थाली में 5 चपाती थी। खाना खाने आने वाले लाेगाें ने बताया कि सब्जी ताजा और राेटी गर्म व नरम थी। इस रसाेई के संचालक सुधीर माथुर ने बताया कि पहली पारी में 156 लाेगाें ने खाना खाया। रेलवे स्टेशन के पास रैन बसेरे में संचालित इंदिरा रसाेई में सुबह के खाने में दाल, साेयाबीन की मंगाेड़ी की सब्जी, राेटी व अचार था। इस रसाेई के संचालक तारीफ सिंह ने बताया कि पहली पारी में 69 लाेगाें ने खाना खाया था। बस स्टैंड स्थित इंदिरा रसाेई में सुबह के खाने में दाल, घीया की सब्जी, राेटी व अचार था। संचालक ने बताया कि सुबह की पारी में 146 लाेगाें ने खाना खाया।
कर्मचारी बोले, रसोई है, इसलिए घर से टिफिन लाना बंद किया
पंचायत समिति परिसर में संचालित इंदिरा रसोई में शुक्रवार सुबह से सायंकाल तक करीब 100 लोगों ने भोजन किया। जिनमें 80 ग्रामीण व 20 पंचायत समिति व नगर पालिका के कार्मिक रहे। संस्था के संचालक डूंगर सिंह मीणा ने बताया कि सुबह करीब 50 कूपन काटे गए। रसोईघर में भोजन करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि हमे घर की तरह यहां भोजन मिलता हैं। अब घर से टिफिन लाने की आवश्यकता नही है, जब मर्जी भूख लगेगी तब जाकर भोजन कर लेंगे। कर्मचारियों के खाने के मामले में विकास अधिकारी कजोड़ मीणा ने बताया कि भोजन व्यर्थ नही जाएं, इसलिए कर्मचारी भोजन कर लेते है। वैसे यह योजना गरीब लोगों के लिए है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष चौथमल सैनी ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से निर्देशित किया गया हैं कि कोई भूखा नही रहे, इसलिए सभी लोग भोजन कर रहे है।
पढ़ने वाले छात्र खाना खाने पहुंचे
राजगढ़| कस्बे के बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे में चल रहे इंदिरा रसोई योजना के दूसरे दिन काफी संख्या में आकर लोगों ने भोजन किया। पालिका की सीओ मीनाक्षी मिश्रा ने इसकी मॉनिटरिंग की। मिश्रा ने बताया कि दूसरे दिन 93 टोकन कटेव इन्हीं लोगों ने भोजन किया। किराए के मकानों में कमरा रह कर पढ़ने वाले राजू, पवन सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि भोजन सस्ता व स्वादिष्ट है। उन्होंने बताया कि उन्हें अब कमरे पर भोजन बनाने की जरूरत नही होगी। भोजन बनाने में लगने वाले समय का सदुपयोग पढ़ाई में कर सकेंगे। इस मौके पर रिक्शा चालक, दहाड़ी मजदूर सहित अन्य लोगों ने भोजन किया। वहीं, अनेक लोगों को भोजन पैक कराकर ले जाते देखा गया। इस मौके पर 150 लोगों का खाना तैयार किया गया।
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