कोविड-19 महामारी के समय भी आयुर्वेद चिकित्सकों के प्रतिनियुक्ति पर पंचायत समितियों में काम करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर आयुर्वेद विभाग ने जवाब पेश किया। जवाब के अनुसार वर्तमान में 31 आयुर्वेद चिकित्सक विभिन्न पंचायत समितियों में ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) के पद पर प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे हैं। इन्हें मूल विभाग में भेजने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। इस संबंध में समन्वयक भी नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने चिकित्सा विभाग को भी इस संबंध में जवाब पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त मुकर्रर की है।
याचिकाकर्ता घेवरचंद की ओर से अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट के समक्ष इस मुद्दे को उठाया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण की महामारी से जूझ रही है। इस महामारी से निबटने के लिए चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की भी कमी है। महामारी पर नियंत्रण के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गत 28 मार्च को प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए थे कि अर्जेंट टेम्परेरी बेसिस पर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ को नियुक्त करें।
मेडिकल स्टाफ, जो रिटायमेंट होने वाले थे, उनकी सेवाएं भी छह महीने के लिए बढ़ाई गई। अधिवक्ता पालीवाल ने कहा कि ऐसे हालात में भी कई आयुर्वेद चिकित्सक हैं, जो प्रतिनियुक्ति पर पंचायत समितियों में विकास अधिकारियों के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। यह अनुचित है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत ऐसे आयुर्वेद चिकित्सकों को उनके मूल विभाग पर वापस भेजने के संबंध में आदेश दिया जाए।

सिर्फ एक साल के लिए थी बीडीओ की सेवाएं

इस संबंध में आयुर्वेद विभाग की ओर से जवाब पेश किया गया कि वर्तमान में 31 आयुर्वेद चिकित्सक ग्रामीण व पंचायतीराज विभाग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। यह सेवाएं केवल एक वर्ष के लिए थीं। इन सभी को कार्यमुक्त कर मूल विभाग में भेजने के लिए गत 9 जुलाई को ही पत्र लिखा गया है। यह भी बताया गया कि 17 जुलाई को सहायक निदेशक रोहिताश्व कुमार शर्मा को इस मामले में समन्वयक नियुक्त किया और उन्हें पंचायतीराज विभाग से व्यक्तिश: संपर्क करने व उन आयुर्वेद चिकित्सकों के मूल विभाग में लौटने तक काम करने के लिए कहा गया है। चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग का जवाब आना है।



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राजस्थान हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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