भगवान शिव का प्रिय माह सावन माह मेवाड़ी रीति से पूर्णिमा पर समाप्त हाेगा, वहीं वागड़ में गुजराती, महाराष्ट् की परम्परा के अनुसार 15 दिन पूर्ण हुए हैं। शहर से दाे किमी दूर उदयविलास पैलेस के आगे हजारेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर में विश्वेश्वर महादेव स्थापित है। मंदिर में ही दस इंच ऊंची वर्गाकार पीठिका बनी हुई है।
इसके मध्य जलाधारी बनी हुई है। इस पर 121 एकादश रुद्र स्वरुप के रूप में विराजमान है। इसके चाराें काेने में रुप्रद पंचायतन देवताओं के यंत्र और बीजाक्षर उत्कीर्ण है। करीब 300 साल से पुराने इस मंदिर में वास्तु का नायाब उदाहरण है।
बीजाक्षर मंत्र उत्कीर्ण कर रुद्र पंचायत की विराजित
इस शिव मंदिर की व्याख्यान आचार्य बालमुकुंद शास्त्री ने की है। उन्हाेंने बताया की रियासतकाल में राजा विद्धान और शिव भक्त थे। उन्हाेंने मंदिर में बीजाक्षर मंत्र उत्कीर्ण कर रुद्र पंचायत विराजमान कराया है। हर मंत्र का मूल मंत्र हाेता है बीजाक्षर मंत्र जैसे क्लीम नम: शिवाय, ओम नम: शिवाय लिखा है। इस मंत्र की महिमा है कि इसके उचारण के साथ अभिषेक से कई गुना फल प्राप्त हाेता है। बीज मंत्र ऊं नम: शिवाय: के साथ जुड़कर ज्यादा प्रभावी हाेती है। रुद्र पंचायतन देवताओं के यंत्र बने हुए हैं। इसमें भगवान का पूजन लाभदायक हाेता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें