झोटवाड़ा इलाके में थाने के पास पीएनबी बैंक के एटीएम मशीन का डिजीटल लॉक खोलकर 17.12 लाख रुपए चुराने वाले बदमाश को शनिवार को झोटवाड़ा थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी आगरा रोड पर जामड़ोली स्थित मंगल विहार निवासी मनीष सोनी के कब्जे से चोरी किए गए पूरे रुपए बरामद कर लिए। आरोपी ने चोरी किए पूरे पैसे एक दोस्त के घर रखवाए थे। आरोपी ने दोस्त को बताया कि ये प्लॉट खरीदने के लिए इक्कट्ठे किए है। अगले दिन दोस्त के साथ घुमकर 3-4 जगह पर प्लॉट देखे भी थे।
डीसीपी प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि इस संबंध में 1 अगस्त को पीएनबी के शाख प्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता ने झोटवाड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि किसी बदमाश ने पासवर्ड के जरिए डिजीटल लॉक खोलकर 17.12 लाख रुपए चोरी कर लिए है। आरोपी ने वारदात के वक्त बूथ में लगे सीसीटीवी कैमरों पर स्प्रे कर दिया था।

जिससे उसका चेहरा पहचाने में नही आ रहा था। वारदात के बाद एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह, झोटवाड़ा एसीपी हरिशंकर शर्मा व एसएचओ विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित टीमों ने घटनास्थल के पास से चारों तरफ जाने वाली रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो एक जगह पर आरोपी का चेहरा सामने आया।

पहचान में सामने आया कि कुछ समय पहले बैंक में चपरासी के पद काम कर चुका मनीष सोनी है। स्पेशल टीम के कांस्टेबल मालीराम को सूचना मिली कि मनीष अभी मोती डूंगरी स्थित बैंक में काम करता है। टीमों ने उसे पकड़कर पूछताछ की तो वारदात कबूल कर ली। आरोपी ने पैसे एक दोस्त के घर छिपा रखे थे।

आरोपी पैसे डालने के दौरान साथ रहता था, खोलने-बंद करने की जानकारी थी
पूछताछ में सामने आया कि यहां नौकरी करने के दौरान आरोपी एटीएम में पैसे डालते समय साथ रहता था और मशीन खोलने-बंद करने के बारे में पूरी जानकारी थी। आरोपी को मशीन के पासवर्ड भी ध्यान थे। इसलिए यहां चोरी करने की योजना बनाई। वारदात वाले दिन घर से बाइक लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचा और बाइक को पार्किंग में खड़ी करके पैदल-पैदल झोटवाड़ा पहुंच गया, जहां पर डेढ़ मिनट में वारदात को अंजाम देकर बैग में पैसे भरकर वापस पैदल-पैदल रेलवे स्टेशन पहुंच गया। आरोपी ने वारदात के बारे में किसी घर वाले को भी नहीं बताया था।

बैंककर्मियों की लापरवाही भी सामने आई
पुलिस जांच में सामने आया कि मशीन में पैसे डालने के दौरान बैंककर्मियों की भी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने पैसे डालने के लिए पुराने फुटेज खंगालने पर सामने आया कि चपरासी से ही लॉक खुलवाकर पैसे डालते है। और लंबे समय तक मशीन के पासवर्ड चेंज नहीं करते है, जो कि बड़ी लापरवाही है।



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बरामद नोट।
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