(संदीप शर्मा) एक ओर कोरोना की वजह से लाखों लोग परेशान हैं, दूसरी ओर बच्चों को लगाए जाने वाली वैक्सीन में ही ‘खेल’ जारी है। जेके लोन अस्पताल में चिकनपॉक्स, हेपेटाइटिस एवन और एमएमआर की वैक्सीन नहीं मिल रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ओर अस्पताल की लाइफ लाइन पर ये वैक्सीन नहीं हैं जबकि अस्पताल के अंदर (पूछताछ कक्ष के पास) ही खोली गए निजी मेडिकल स्टोर पर इन वैक्सीन को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। मुनाफे के इस खेल में पिछले कई दिनों से सैंकड़ों मरीजों को महंगी वैक्सीन बेची जा चुकी है। सवाल यह भी कि लंबे समय से अस्पताल में चल रहे इस खेल में प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है?

लाइफलाइन को सप्लाई नहीं, 3 गुना महंगा बेचने वाले के पास फुल स्टॉक

चिकनपॉक्स
लाइफलाइन पर 1630 रु. में वैक्सीन मिलती थी।
निजी मेडिकल स्टोर पर 2000 रु. में बिक रही

हेपेटाइटिस ए वन
लाइफलाइन मेंं 1100 में रेट तय। पड़ोस में 1600 रु. लिए जा रहे।

एमएमआर वैक्सीन
सिर्फ 200 की यह वैक्सीन 600 रुपए में बेची जा रही।

  • रोजाना 100 से अधिक बच्चों को ये वैक्सीन लगती हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि लाखों रुपए की मुनाफाखोरी हो रही।
  • सवाल- एक ही अस्पताल में रियायती दवा देने वाले मेडिकल स्टोर पर तो वैक्सीन नहीं दी जा रही, दूसरे निजी स्टोर पर दवा कंपनियां वक्त पर सप्लाई कर रही हैं।

^ कई रेजीडेंट बाहर के वैक्सीन लिख देते हैं, इसलिए बीच में इश्यू हुआ था। हम पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन लाइफ लाइन पर होनी चाहिए।
-डॉ. अशोक गुप्ता, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल।

6 दिन से लाइफलाइन के पास निजी मेडिकल स्टोर से ही बिक रही हैं ये वैक्सीन

जेके लोन अस्पताल में चिकनपॉक्स, हेपेटाइटिस ए वन और एमएमआर वैक्सीन लाइफलाइन के माध्यम से दी जाती हैं, लेकिन पिछले 6 दिनों से लाइफलाइन में उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को अस्पताल परिसर में ही एक निजी मेडिकल स्टोर से ये वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है। बड़ा सवाल यह है कि लाइफलाइन में इतने दिन से वैक्सीन क्याें नहीं आ रही, जबकि पास ही की दुकान में सप्लाई वक्त पर हो रही है, जहां महंगे दामों में वैक्सीन बेची जा रही हैं।

35% कम रेट की शर्त थी
लाइफलाइन के टेंडर में शर्त है कि मार्केट रेट से 35% कम कीमत में दवा और वैक्सीन दी जाएंगी, लेकिन अब लाइफलाइन में आने वाले ग्राहकों को ये वैक्सीन नहीं होने का बताया जाता है। मरीजों को मजबूरन नजदीकी स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।
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